छत्तीसगढ़ से जुड़ी किंवदंती? पर दो स्थानीय लोगों की उत्तेजक बातचीत से आह्लादित पत्रकार सुश्री लक्ष्मी शरथ (Lakshmi Sharath) ने बस्तर, छत्तीसगढ़ पर यात्रा-वृत्तांत लिखा है, शीर्षक है - CHATTISGARH: Watching in delight as two locals heatedly discuss the legend associated with the State
लेख में कहा गया है- The local women saw Sita with two men and exclaimed she had two husbands. “Sita immediately retorted that each of these women will have Chattison (36) husbands,” says Mumtaj as we break into laughter. Toppoji and Mumtaj continue to discuss how most women in Chhattisgarh do have multiple husbands, although Mumtaj adds hurriedly: “Not everybody though.
अनुवाद कुछ इस तरह होगा- ''स्थानीय महिलाओं ने दो पुरुषों के साथ सीता को देखा और कहा कि इसके तो दो पति हैं, सीता ने तत्क्षण व्यंग्यपूर्वक कहा, इनमें से प्रत्येक औरत के छत्तीसों (36) पति हों। मुमताज के ऐसा कहते ही हम ठठाकर हंस पड़े । टोप्पोजी और मुमताज आगे बात करते रहे कि कैसे छत्तीसगढ़ की अधिकतर महिलाओं के बहुत सारे खसम होते हैं यद्यपि, मुमताज ने जल्दी से कहा, सबके साथ नहीं।''
सुश्री शरथ ने लांछनापूर्ण लेखन कर, बरास्ते विवाद, धार्मिक भावना और छत्तीसगढ़ की अस्मिता को चोट पहुंचाने का भर्त्सना-योग्य तथा अभद्र कार्य किया है। पाश्चात्य बौद्धिक जगत से प्रेरित, भ्रमित और गैर-जिम्मेदार लेखक, तात्कालिक प्रसिद्धि और बिकाऊपने के लिए ईश निन्दा का भी रास्ता अपना लेते हैं, उनका यह लेखन चर्चित होने का ऐसा ही ओछा और सस्ता हथकण्डा दिखता है।
'द हिन्दू' जैसे अखबार में ऐसी सामग्री प्रकाशित होना चिंताजनक है और इस पूरे मामले में मुझे (बस्तर, छत्तीसगढ़ में रहे श्री पा ना सुब्रहमनियन तथा छत्तीसगढ़ में रचे-पचे डा. बी के प्रसाद सहित), हम सबके मर्यादित बने रहने पर अफसोस हो रहा है।
