अपने बारे में

राहुल कुमार सिंह
जन्म - 1958

शिक्षा
  • आरंभिक शिक्षा गृहग्राम अकलतरा में
  • स्वर्ण पदक सहित स्नातकोत्तर उपाधि (प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व)।
  • प्रावीण्यता सहित स्नातकोत्तर पत्रोपाधि (संग्रहालय विज्ञान)।
शासकीय सेवा- 1984 से लगातार सेवा में रहते हुए माह नवम्बर 2020 में अधिवार्षिकी आयु पूर्ण कर संस्कृति विभाग के अंतर्गत संयुक्त संचालक के पद से सेवानिवृत्त। समय-समय पर संचालनालय संस्कृति एवं पुरातत्व के विभागाध्यक्ष के पद दायित्व का निर्वाह।

पुरातत्व में गुरु- डा. विष्णु सिंह ठाकुर, डा. लक्ष्मी शंकर निगम, डा. प्रमोदचंद्र, पद्मभूषण मधुसूदन ए. ढाकी, श्री कृष्णदेव, डा. कल्याण चक्रवर्ती, श्री गिरधारीलाल रायकवार

प्रशिक्षण
  • फेलो-1991, अमेरिकन इन्स्टीट्‌यूट आफ इंडियन स्टडीज, वाराणसी/नई दिल्ली,
  • 1981 में राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली,
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पुरातत्व संस्थान, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली
  • प्रशासन अकादमी, भोपाल से अकादमिक-तकनीकी तथा
  • प्रशासन अकादमी, भोपाल एवं रायपुर से प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त।
  • छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के गत 15 वर्षों के विभिन्न बैच के उन्मुखीकरण कार्यक्रम एवं अन्य सेवाओं के अधिकारियों को प्रशिक्षण-व्याख्यान।।
  • शालाओं, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालय, विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग, इन्टैक, राष्ट्रीय सेवा योजना आदि के विभिन्न कार्यक्रमों में विशेषज्ञ-प्रशिक्षक के रूप में आमंत्रित।
शोध
  • 'जांजगीर का विष्णु मंदिर' तथा 'भारतीय संग्रहालय के कार्य' अकादमिक शोध-लेखन।
लेखन-संपादन
  • छत्तीसगढ़ राज्य गठन के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग एवं म.प्र. हिन्दी ग्रंथ अकादमी के समवेत उपक्रम की पत्रिका 'रचना' द्विमासिक नवंबर 2000 अंक में 'छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़िया' शीर्षक से मुख्‍य लेख प्रकाशित।
  • प्रसिद्ध नाटक 'जसमा ओड़न' का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद।
  • ब्लॉग 'सिंहावलोकन'।
  • साहित्यिक एवं शोध पत्र-पत्रिकाओं, आकाशवाणी, दूरदर्शन के लिए कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विषयों पर नियमित लेखन, वक्तव्य।
  • पुरातत्‍व की विभागीय शोध-पत्रिका 'कोसल' का संपादन।
  • छत्‍तीसगढ़ के अभिलेखीय इतिहास के प्रामाणिक ग्रंथ 'उत्‍कीर्ण लेख' का सहलेखन'(2003),संग्रहालय विज्ञान का परिचय' (2017), उपन्‍यासिका 'एक थे फूफा' (2018, 2019), लेख संग्रह 'सिंहावलोकन' (2019), राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत सात पुस्तिकाओं का बच्चों के लिए द्विभाषी संस्करण, छत्तीसगढ़ी अनुवाद तथा पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ का लोक-पुराण‘ (2023) नेशनल बुक ट्र्स्ट, नई दिल्ली से प्रकाशित तथा समग्र शिक्षा वर्ष 2024-25 के लिए चयनित। ।
फिल्‍म
  • छत्‍तीसगढ़ के विशिष्‍ट समुदाय रामनामियों पर, फिल्‍म्‍स डिवीजन, भारत सरकार के लिए 2011 में 51 मिनट का वृत्‍त चित्र, श्री सुनिल शुक्‍ला और श्री कमल तिवारी के साथ मिल कर निर्माण, विशेषज्ञ के रूप में शामिल ।
  • छत्‍तीसगढ़ के विशिष्‍ट भौगोलिक-धार्मिक-पुरातात्विक-पर्यटन स्‍थल मदकू दीप पर डा. ब्रजकिशोर प्रसाद के साथ मिल कर शौकिया फिल्‍म निर्माण, विशेषज्ञ की भूमिका।
उत्खनन/सर्वेक्षण/परियोजना
  • बिलासपुर - ताला (रूद्र शिव प्रतिमा)/ रायपुर - सिसदेवरी/ सरगुजा- डीपाडीह, कलचा-भदवाही और महेशपुर/ बस्तर- गढ़ धनोरा और भोंगापाल/ बलौदा बाजार- डमरू, दुर्ग- जमराव
  • ग्वालियर संभाग के राज्य संरक्षित स्मारकों तथा संग्रहालयों का अभिलेखन, परीक्षण व सत्यापन
  • लालबाग पैलेस, इन्दौर के विभाग को हस्तांतरण में भूमिका
  • ओरछा के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डी.पी.आर.) तैयार करने में प्रमुख भूमिका
  • छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के 500 से भी अधिक ग्रामों का ग्रामवार पुरातत्वीय व सांस्कृतिक सर्वेक्षण।

  • संस्कृति में भूमिका
    • छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पश्चात्‌ शासकीय दायित्व के क्रम में राज्योत्सव (राजधानी व जिलों में), संसद में, राज्य दिवस (प्रगति मैदान, नई दिल्ली में), गणतंत्र दिवस, स्वाधीनता दिवस आदि विभिन्न अवसरों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन एवं विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से कलाकारों, शिल्पकारों से सतत्‌ सम्पर्क।
    • इ.गा.रा.मानव संग्रहालय, भोपाल के राष्ट्रीय आयोजन 'चिन्हारी' 1995 में छत्तीसगढ़ के लिए समन्वय
    • IFAD (International Fund for Agricultural Development) के अंतर्गत बिलासपुर इकाई के गठन (सन्‌ 2000) में कोर ग्रुप सदस्य
    • IGNCA (Indira Gandhi National Centre for Art), Delhi और छत्तीसगढ़ शासन के MoU 2008 में 'Spirit of Chhattisgarh' परियोजना के लिए कार्य।
    अन्‍य
    • प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर राज्य प्रशासनिक सेवा के लिए कैरियर मार्गदर्शक के रूप में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, जी 24 घंटे के लिए उड़ान में तथा अन्य संस्थाओं के लिए और स्वतंत्र रूप से निःशुल्क मार्गदर्शन।
    सम्मान
    • सन 2008 में बिलासा सम्मान से सम्मानित।
    • सन 2011 वर्ष के 'श्रेष्‍ठ ब्‍लॉग विचारक' अन्‍तर्राष्‍ट्रीय हिन्‍दी ब्‍लॉगर सम्‍मान-2012।
    • सन 2013 में पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वतीजी महाराज द्वारा साहित्यकार के रूप में ‘धरती-पुत्र‘ सम्मान।
    • इंडिया टुडे संस्कृति सम्मान-2019।
    सम्प्रति

            प्रमुख, धरोहर परियोजना,

            बायोडायवर्सिटी एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च सेंटर

            Head, Heritage Programs,

            Biodiversity Exploration and Research Centre (BERC)


    सम्पर्क - 409, एक्जाटिका, टीवी टावर के सामने
    शंकर नगर, रायपुर 492004
    फोन - 9425227484 (मोबाइल), 07714052826 (निवास)
    ई-मेल rahulsinghcg@gmail.in
    ब्‍लॉग – सिंहावलोकन http://akaltara.blogspot.in

    पुनश्च- आदरणीय तारन प्रकाश सिन्हा जी, आईएएस की उदारता ऐसी कि उल्लेख करते संकोच हो। श्री सिन्हा जनसंपर्क विभाग औैर मुख्यमंत्री सचिवालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, 30 नवंबर 2020 को अपने फेसबुक वॉल पर यह पोस्ट लगाई थी।

    राहुल सिंह आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

    ऐसा बहुत कम होता है कि कोई व्यक्ति अपने अनुभव, ज्ञान, कार्यकुशलता और मिलनसारिता के बूते अपने संस्थान की ही पहचान बन जाए, और यदि ऐसा हो जाए तो ऐसे व्यक्ति की सेवानिवृत्ति भी संस्थागत रिक्तता-सी प्रतीत हुआ करती है। और फिर संस्कृति विभाग के संयुक्त-संचालक राहुल जी की सेवानिवृत्ति से होने वाली रिक्तता तो इससे भी कहीं ज्यादा है। 
    विभागीय संचालक
    श्री तारन प्रकाश सिन्हा तथा श्री जितेन्द्र शुक्ला
    के साथ

    राहुल जी मूल रूप से अकलतरा के हैं , अकलतरा पूर्व में अविभाजित बिलासपुर ज़िले का भाग था , राहुल जी से पारिवारिक संबंधो के साथ शासकीय सम्बंध भी रहे .मुझे संस्कृति विभाग के संचालक के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला, और इस तरह उन्हें करीब से जानने-समझने का भी। प्रदेश की संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व को लेकर न केवल उनकी गहरी समझ है, बल्कि मौलिक दृष्टि भी है। अपनी माटी को लेकर उनका  दृष्टिकोण एक ठेठ-छत्तीसगढ़िया का दृष्टिकोण है, जिसमें अपने सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने की छटपटाहट है। ददरिया से लेकर बांस-गीत तक, प्रतिमाओं से लेकर मुद्राओं तक, भाषा से लेकर भंगिमाओं तक, मालगुजारों से लेकर राजे-महाराजाओं तक, चिड़ियों से लेकर तितलियों तक, ऐसे ढेरों विषय हैं, जिनमें आप उनसे घंटों बात कर सकते हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर विषय उनके काम से ही जुड़े हुए हैं, लेकिन उससे कहीं ज्यादा उनकी जीवनचर्या से भी। राज्य की संस्कृति और पुरातत्व के संरक्षण-संवर्धन के लिए उन्होंने अपने दायित्वों से कहीं आगे जाकर काम किया। उन्होंने न केवल राज्य के कलाकारों को, संस्कृतिकर्मियों को, पुरा-प्रेमियों को अपने साथ जोड़े रखा, बल्कि युवाओं को भी हमेशा साथ लेकर चलते रहे।

    राहुल जी एक बढ़िया लेखक भी हैं। उनकी एक पुस्तक “एक थे फूफा “ पठनीय है ,उनका एक लोकप्रिय ब्लाग है- सिंहावलोकन। इस ब्लाग का मैं भी नियमित पाठक हूं। वे एक लेखक और शोधार्थी के रूप में भी इस ब्लाग के जरिये प्रदेश के सांस्कृतिक वैभव को समृद्ध करते रहे हैं। संतोष की बात यह है कि उनका यह ब्लाग अब मार्गदर्शी किताब के रूप में भी हमारे लिए उपलब्ध है।

    शायद यह राहुल सिंह जी  की उपस्थिति के कारण ही था कि संस्कृति विभाग के बाद अब जनसंपर्क विभाग में काम करते हुए मुझे विभागीय दूरी कभी महसूस ही नहीं हुई। जब भी आवश्यकता हुई, राहुल जी ने उतनी ही तत्परता से मेरी मदद की।

    राहुल जी की सेवानिवृत्ति हालांकि एक विभागीय प्रक्रिया है, लेकिन इस अनिवार्य घटना का सुखद पहलु यह है कि एक विशेषज्ञ, शोधार्थी और लेखक के रूप में हम सबके बीच अपनी कहीं ज्यादा व्यापकता के साथ उपस्थित रहेंगे। उनकी रचनात्मकता के जरिये उनके अनुभवों का लाभ हमें मिलता रहेगा। राहुल जी को भविष्य के लिए बहुत शुभकामनाएँ ।



    12 comments:

    1. सर जी सबसे पहले आप अपने सम्मान के लिए बधाई .आप हंसते हुए बहुत अच्छे लगते हैं . आपको मेरी भी उम्र लग जाये . पारिवारिक फोटोग्राफ बहुत खुबसूरत .

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    2. इतनी सारी उपाधि और सम्मान के लिए बधाई,,,राहुल जी,,,, recent post हमको रखवालो ने लूटा

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    3. आज आपकी कार्य प्रणाली एवम आपकी उपलब्धियों के विषय में जानकर बहुत गर्व का अनुभव
      कर रही हूँ ,कि आप जैसा प्रतिभाशाली एवम निष्ठावान व्यक्तित्त्व , एक पुरात्तत्ववेत्ता के रुप में
      हम छत्तीसगढ-वासियों को उपलब्ध है । आपकी साधना स्तुत्य है । ईश्वर करे आप शिखर को
      छुयें ।
      सिद्धि स्वयं आकर पूछे बोलो "राहुल" क्या चाहते हो ?
      यह स्थिति भी चलकर आएगी क्या सहज स्वयं को पाते हो ?

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    4. Salutation to the deeds and achievements of our pioneer.

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    5. Just like a fruit laden tree bows to give, similarly a true seeker of knowledge like Rahul ji embraces humbleness.....My salutation and respects

      manoj misra

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    6. सर जी आपको सादर प्रमा आपकी उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिये गौरव की बात है

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    7. sir ji kya aap apne blog ko attaractive dikhana chahte hai ?

      text style, theme design or content design or bhi bohat cheeje jisme aapka blog accha dikhe, uske lie aap mujhse contact kar sakte hai.

      me apko apne dwara design kiye huye sample bhi show kara sakta hu jisse apko or thoda blog design accha karne ka idea bhi mil jaye.

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    8. सर आपसे मिलना चाहता हूँ

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    9. आज मैं छत्तीसगढ़ की एक महान विभूति से जुड़कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। श्रीयुत राहुल कुमार सिंह जी की सृजनात्मक सक्रियता की कामना करता हूँ।

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    10. यह एक राजपूत यह इसलिए इतनी विनम्रता से पेश आते है इन मैं कभी घमंड ईर्ष्या नहीं होता असली राजपूताना ख़ून हमेशा शालीनता झलकती है

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    11. Subject: Inquiry from the granddaughter of Dr. Vishnu Singh Thakur
      ​Dear Rahul Sir,
      ​My name is Shivangi Thakur, and I am the granddaughter of Dr. Vishnu Singh Thakur. I recently came across your blog, Simhavalokan, and was deeply moved to see the photo of you with my grandfather and read how much he inspired your career.
      ​Our family is currently trying to preserve his legacy, and I am looking for any video footage of him—specifically from the "Tala" documentary or the 2013 Rajyotsav award ceremony.
      ​Since you were his student and a close colleague, I was hoping you might have digital copies of these or could guide me on how to obtain them. It would mean the world to our family to hear his voice and see him at work again.
      ​Thank you for keeping his memory alive through your writing.
      ​Warm regards,
      Shivangi Thakur

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