# शीर्षक # ताला # होली # कठपुतलियां # कोरोना में किताबें # मेरी पढ़ाई # कोरोना में गांधी # अद्वैत का द्वंद्व # जगन्मिथ्या # जन्म-जन्मांतर # राग मारवा # बिलासपुर की त्रिवेणी-1966 # भानु जी के पत्र-2 # भानु जी के पत्र-1 # गिधवा में बलही # चौपाल # टट्टी-1918 # राजस्थानी # गांधीजी की तलाश # असमंजस # छत्तीसगढ़ी दानलीला # पवन ऐसा डोलै # त्रिमूर्ति # अमृत नदी # कोरोना में कलाकार # सार्थक यात्राएं # शिकारी राजा चक्रधर # चौपाल # कौन हूँ मैं # छत्तीसगढ़ के शक्तिपीठ # काजल लगाना भूलना # पितृ-वध # हाशिये पर # राज्‍य-गीत # छत्तीसगढ़ की राजधानियां # ऐतिहासिक छत्‍तीसगढ़ # आसन्न राज्य # सतीश जायसवाल: अधूरी कहानी # साहित्य वार्षिकी # खुमान साव # केदारनाथ सिंह के प्रति # मितान-मितानिन # एक थे फूफा # कहानी - अनादि, अनंत ... # अभिनव # समाकर्षात् # शहर # इमर # पोंड़ी # हीरालाल # हिन्दी का तुक # त्रयी # अखबर खान # स्थान-नाम # पुलिस मितानी # रामचन्द्र-रामहृदय # बलौदा और डीह # धरोहर और गफलत # अस्सी जिज्ञासा # देश, पात्र और काल # सोनाखान, सोनचिरइया और सुनहला छत्‍तीसगढ़ # बनारसी मन-के # राजा फोकलवा # रेरा चिरइ # हरित-लाल # केदारनाथ # भाषा-भास्‍कर # समलैंगिक बाल-विवाह! # लघु रामकाव्‍य # गुलाबी मैना # मिस काल # एक पत्र # विजयश्री, वाग्‍देवी और वसंतोत्‍सव # बिग-बॉस # काल-प्रवाह # आगत-विगत # अनूठा छत्तीसगढ़ # कलचुरि स्थापत्य: पत्र # छत्तीसगढ़ वास्तु - II # छत्तीसगढ़ वास्तु - I # बुद्धमय छत्तीसगढ़ # ब्‍लागरी का बाइ-प्रोडक्‍ट # तालाब परिशिष्‍ट # तालाब # गेदुर और अचानकमार # मौन रतनपुर # राजधानी रतनपुर # लहुरी काशी रतनपुर # रविशंकर # शेष स्‍मृति # अक्षय विरासत # एकताल # पद्म पुरस्कार # राम-रहीम # दोहरी आजादी # मसीही आजादी # यौन-चर्चा : डर्टी पोस्ट! # शुक-लोचन # ब्‍लागजीन # बस्‍तर पर टीका-टिप्‍पणी # ग्राम-देवता # ठाकुरदेव # विवादित 'प्राचीन छत्‍तीसगढ़' # रॉबिन # खुसरा चिरई # मेरा पर्यावरण # सरगुजा के देवनारायण सिंह # देंवता-धामी # सिनेमा सिनेमा # अकलतरा के सितारे # बेरोजगारी # छत्‍तीसगढ़ी # भूल-गलती # ताला और तुली # दक्षिण कोसल का प्राचीन इतिहास # मिक्‍स वेज # कैसा हिन्‍दू... कैसी लक्ष्‍मी! # 36 खसम # रुपहला छत्‍तीसगढ़ # मेला-मड़ई # पुरातत्‍व सर्वेक्षण # मल्‍हार # भानु कवि # कवि की छवि # व्‍यक्तित्‍व रहस्‍य # देवारी मंत्र # टांगीनाथ # योग-सम्‍मोहन एकत्‍व # स्‍वाधीनता # इंदिरा का अहिरन # साहित्‍यगम्‍य इतिहास # ईडियट के बहाने # तकनीक # हमला-हादसा # नाम का दाम # राम की लीला # लोक-मड़ई और जगार # रामराम # हिन्‍दी # भाषा # लिटिल लिटिया # कृष्‍णकथा # आजादी के मायने # अपोस्‍ट # सोन सपूत # डीपाडीह # सूचना समर # रायपुर में रजनीश # नायक # स्‍वामी विवेकानन्‍द # परमाणु # पंडुक-पंडुक # अलेखक का लेखा # गांव दुलारू # मगर # अस्मिता की राजनीति # अजायबघर # पं‍डुक # रामकोठी # कुनकुरी गिरजाघर # बस्‍तर में रामकथा # चाल-चलन # तीन रंगमंच # गौरैया # सबको सन्‍मति... # चित्रकारी # मर्दुमशुमारी # ज़िंदगीनामा # देवार # एग्रिगेटर # बि‍लासा # छत्‍तीसगढ़ पद्म # मोती कुत्‍ता # गिरोद # नया-पुराना साल # अक्षर छत्‍तीसगढ़ # गढ़ धनोरा # खबर-असर # दिनेश नाग # छत्तीसगढ़ की कथा-कहानी # माधवराव सप्रे # नाग पंचमी # रेलगाड़ी # छत्‍तीसगढ़ राज्‍य # छत्‍तीसगढ़ी फिल्‍म # फिल्‍मी पटना # बिटिया # राम के नाम पर # देथा की 'सपनप्रिया' # गणेशोत्सव - 1934 # मर्म का अन्‍वेषण # रंगरेजी देस # हितेन्‍द्र की 'हारिल'# मेल टुडे में ब्‍लॉग # पीपली में छत्‍तीसगढ़ # दीक्षांत में पगड़ी # बाल-भारती # सास गारी देवे # पर्यावरण # राम-रहीम : मुख्तसर चित्रकथा # नितिन नोहरिया बनाम थ्री ईडियट्‌स # सिरजन # अर्थ-ऑवर # दिल्ली-6 # आईपीएल # यूनिक आईडी

Saturday, December 12, 2020

चौपाल

हमर राज्य के छत्तीस ठन गढ़ मन बर कहे जाथे, सिवनाथ नदी के उत्तर म अठारह अउ सिवनाथ नदी के दक्षिण म अठारह। मगर ए छत्तीस गढ़ मन हमर राज्य के बीच के मैदानी भाग म ही आवंय, ए कर अलावा राज्य के उत्तर म सरगुजा राज, जे म कोरिया अउ जशपुर राज भी शामिल हे अउ दक्षिण म बस्तर राज, जे म सुकमा-कोन्टा, बीजापुर-भोपालपट्टनम, नारायणपुर-अबुझमाड़, कांकेर इलाका भी हावय। ए कर अलावा पूर्व अउ पश्चिम म रायगढ़ अउ नांदगांव है। सड़के-सड़क जाए म पाली-कटघोरा से आगू जात म ताराघाट पहुंचे के बाद, भाखा-बोली म साफ फरक पता लगे लगथे। अउ एती बस्तर जात घानी चारामा-कांकेर ले केसकाल के बाद आने राज आ गएन कस अपन मन के जनाथे।

छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास ल देखत म ए बात साफ दिखथे कि हमर आज के छत्तीसगढ़, पहिली समय म भौगोलिक रूप से अलग-अलग रहिस, लेकिन आपस म सांस्कृतिक संबंध रहिस हे। जइसे आज भी राज्य के सीमावर्ती क्षेत्र म पड़ोसी राज्य मन संग हमर सांस्कृतिक आदान-प्रदान अउ एकता बने हुए हे। कई बार हम खुद अपन दायरा ल सीमित करे बर धरथन, अउ ए कर से अपने राज्य के कला-संस्कृति ह हम ल अनचिन्हार कसन लगे लगथे। जबकि हम सभी एक सनातन परंपरा के अंग अन, जे कर क्षेत्रवार अपन-अपन ढंग से विकास अउ परिवर्तन होए हे। अपन ले थोरको आने भाखा-बोली, खान-पान, रहन-सहन, पहिरावा-ओढ़ावा देख के ओ म हम ल रुचि होथे, ओ कर आकर्षण होथे, लेकिन कई बार हम अपन सोच ल सीमित कर के आने परंपरा के सम्मान करे म हिचक जाथन। जबकि जे ल अपन परंपरा म आस्था हे, प्रेम हे, गर्व हे, ओ कर बर मजबूत हे ते हर आने कला-संस्कृति के भी सम्मान करथे, ओ म रस लेथे।

एक हफ्ता आड़ कर के हर पाख म बिरस्पत के हरिभूमि पेपर के ‘चौपाल‘, जइसे ए कर नांव हे, तइसनहे ए कर पहिचान। ए मंच म छत्तीसगढ़ के चारों मुड़ा रंग-रंग के जानकारी मिल जाथे। कला, संस्कृति, साहित्य, इतिहास-पुरातत्व, ए सब विषय, जे कर से हमर पहिचान बनथे, जे कर बर हम ल गर्व होथे, ते सब पारी-पारी यहां बरगट होत रथे। तिहार आही, त तिहार, अउ जइसनहा मौसम-लगन हे, तइसे सचित्र अउ रोचक जानकारी। चौपाल के अंक मन कतको झन होहीं, जे मन ओ ल अगोरत रथें, जतन के राखथें, अउ समय-समय म फेर-फेर लहुटा के देखत-पढ़त रथें। चैपाल के अंक मन ह छत्तीसगढ़ी संस्कृति के कोश बनत जात हे, जे ल किसी भी संदर्भ बर देखे जा सकत हे। ए कर सब ले जादा खासियत यही आए कि ए माध्यम से हमर वर्तमान पूरा राज्य के संस्कृति के हर पक्ष ल शामिल किए जाथे। राज्य के संस्कृति-प्रेमी अउ जानकार मन ए कर से प्रेम बनाए रखे हें अउ अपन सहयोग देथें, अउ ए मंच से लेखक-पाठक संबंध मजबूत होथे।

ए बीच म करोना के संकट आए हे। ए हर एक प्रकार के दुकाल आए। हमन इतिहास म बड़े-बड़े महामारी अउ अकाल-दुकाल के सामना करे हन। एहू ह एक प्रकार के फिरे दिन आय, ‘रहिमन चुप हो बैठिए, देख दिनन के फेर‘। ए समय ह धीरज धर के निभाए के आय। एक तरफ ए संकट हे, त दूसर तरफ सरकार, स्वयंसेवी संस्था अउ कतको अइसनहा लोग हें, जे मन अड़चन म परे मन के मदद करत हें। बेमारी से बचाव, इलाज के व्यवस्था किए जात हे। ए ध्यान रखना हे कि ए समय के मार ह सब उपर हे, पूरा दुनिया के हर आदमी किसी न किसी तरह से प्रभावित होए हे। ए समय म पहिली हम ल अपन सुरक्षा, फेर अपन घर-परिवार, पास-परोस के ध्यान रखना जरूरी हे। ए हर अइसनहा बेमारी अउ समय आय कि आने उपर परिही त हमू ल घालिही। ते पा के ए मौका म हम ल अपन साथ-साथ पूरा समाज बर सोचना हे। अउ जे कर से जे बन परय, एक दूसर के मदद करना हे। अइ हमर संस्कृति आय। प्रकृति हर सभ्यता के सामने चुनौती खड़ा करथे अउ परीक्षा लेथे, लेकिन हम अपन धीरज, बुद्धि-विवेक से हर कठिन परिस्थिति के सामना करथन अउ हर संकट के बाद अपन ल अधिक नया अउ ताजा रूप म, जीवन के नया उत्साह सहित आगे बढ़थन। 

मो ल पूरा भरोसा हे कि आगे आने वाला समय ह हमर हेल-मेल, भाईचारा अउ खुशहाली के होही। हम अपन कला-संस्कृति संग अपन अस्मिता के गौरव महसूस करत हुए एक सुंदर समाज के रचना म अपन योगदान देबो।