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Wednesday, February 16, 2022

सिंहावलोकन-अभिलेखागार

सिंहावलोकन‘ वेब-लॉग (ब्लॉग), मुख्यतः संस्कृति संबंधी जानकारियों को सुलभ सार्वजनिक करने के साथ, दस्तावेजों को डिजिटाइज कर संरक्षित करने प्रयास है। इस उद्देश्य की पूर्ति पिछले 11 साल, 11 महीने में, इसके 300 पोस्ट से हो रही है, जिसकी सूची यहां है, इन पंक्तियों के लिखे जाने तक 469500 पार, यानि औसतन प्रतिदिन 100 से अधिक बार देखी गई है। कुछ सम्मान, पुरस्कार मिले, प्रशंसा मिलती रही, वह काम की दिशा निर्धारित करने में मददगार रही।

21 अप्रैल 2010 से ‘यूनिक आईडी‘ पोस्ट के साथ आरंभ ‘सिंहावलोकन‘ पर अब तक के पोस्ट के चार दौर हैं। पहला, अप्रैल 2010 से जनवरी 2013 तक, प्रति माह 4 पोस्ट का क्रम, दो-एक अपवाद के साथ चलता रहा, जिस दौरान 134 पोस्ट आए। दूसरा, फरवरी 2013 से जनवरी 2020 तक यह क्रम सुस्त रहा और 43 पोस्ट आए। तीसरा, कोरोना का दौर आया मार्च 2020 से अक्टूबर 2020 तक, जिसमें 16 पोस्ट और फिर चौथा, नवंबर 2020 में सेवानिवृत्ति के बाद दिसंबर 2020 से 194 से आगे, 11 फरवरी 2022 तक 107 पोस्ट मिला कर कुल 300 पोस्ट हो गए। इस तरह पहले दौर के 34 महीने में 134 पोस्ट, दूसरे 84 महीने के दौर में 43, तीसरे 8 महीने में 16 और ‘अनमोल दस्तावेज‘ पोस्ट के साथ 300 पहुंचने का यह चौथा दौर 15 महीने में 107 पोस्ट का रहा। लगा कि कुछ ठहर कर देख लिया जाय कि हो क्या रहा है, जो हो रहा है, क्या वही करना चाह रहा हूं?

अपने स्तर पर इसी तरह आगे बढ़ते रहने का प्रयास रहेगा, लेकिन विचार है कि राज्य का अधिकृत डिजिटल प्लेटफार्म होना चाहिए, जिसे ‘छत्तीसगढ़ वेब-अभिलेखागार Chhattisgarh Web Archive‘ जैसा नाम दिया जा सकता है। शासकीय सेवा में रहते हुए तथा उसके बाद भी मेरे द्वारा विभिन्न मंचों पर इस संबंध में अपनी बातें रखने का प्रयास किया जाता रहा है, जिसे नीचे संयोजित किया गया है-

छत्तीसगढ़ की संस्कृति, साहित्य और इतिहास के प्रामाणिक और प्राथमिक स्रोतों को एकत्रित और सुरक्षित करते हुए इंटरनेट के माध्यम से सर्वसुलभ बनाने की दृष्टि से वेब-अभिलेखागार आवश्यक है जो राज्य के गौरव की तथ्यात्मक और ऐतिहासिक जानकारी, हमारे समकालीन जीवन की समग्रता में (राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक) जानकारी उपलब्ध हो जो भविष्य में इस कालखंड पर शोध एवं लेखन करने वालों के लिए आधार उपलब्ध कराएं।

● वेब-अभिलेखागार में अंगरेजी, हिन्दी, छत्तीसगढ़ी तथा अन्य आंचलिक भाषा-बोली की पुरानी पुस्तकें, जो अब सहज उपलब्ध नहीं हैं, शासकीय पत्राचार, रिपोर्ट-प्रतिवेदन, शोधपत्र, डायरियां व अन्य उक्त प्रयोजन के अनुरूप निजी पत्र जैसी सामग्री को डिजिटाइज कर नेट पर अपलोड किया जाए।
● वर्तमान में विभिन्न स्तरों पर ऐसे प्रयास हुए हैं, जैसे संस्कृति विभाग द्वारा सहपीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति से संबंधित 60 माड्यूल्स तैयार कर अपलोड कराए गए हैं। पं. रविशंकर विश्वविद्यालय द्वारा शोध-प्रबंधों को डिजिटाइज किया गया है। कुछ निजी वेबसाइट जैसे 'आरंभ' एवं 'गुरतुर गोठ' पर ऐसी सामग्री अपलोड की गई है। 
● राज्य का अभिलेखागार, संस्कृति विभाग के अधीन है। मध्यप्रान्त और बरार, नागपुर के अभिलेखागार की सामग्री, सन 1956 में मध्यप्रदेश, भोपाल में स्थानांतरित की गई, जहां छत्तीसगढ़ से संबंधित लगभग 6 लाख पृष्ठ सामग्री होने का अनुमान है। ऐसी सभी सामग्री को वर्गीकृत, सूचीकरण कर अपलोड करना, औचित्यपूर्ण और सार्थक होगा। 
● इसके अतिरिक्त राज्य में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली के मैन्युस्क्रिप्ट मिशन के तहत कराए गए सर्वेक्षण से ऐसी महत्वपूर्ण सामग्री की जानकारी एकत्र की गई है। राज्य के पुराने शासकीय कार्यालयों, (जिला कार्यालय, स्कूल, वन विभाग, पुलिस थाना आदि) संस्थाओं तथा निजी संग्रहों में अब भी ऐसी सामग्री है, जिसकी जानकारी एकत्र कर उसे डिजिटाइज कर सर्वसुलभ कराया जाना आवश्यक है। 
● वर्तमान डिजिटल युग की स्थितियों और आवश्यकता को देखते हुए अभिलेखागार के लिए विशाल भवन की तुलना में प्राथमिक रूप से एक अच्छे समृद्ध और व्यवस्थित वेब-पोर्टल की आवश्यकता है, यह ‘सूचना के अधिकार‘ की मंशा के भी अनुरूप होगा, जहां राज्य के गौरव की तथ्यात्मक और ऐतिहासिक जानकारी और दस्तावेजों के मूल की डिजिटल प्रतियां उपलब्ध हो, जो शोधकर्ताओं, अध्येताओं, राज्य में रुचि रखने वालों के लिए आधारभूत विश्वसनीय जानकारी सर्वसुलभ उपलब्ध कराए तथा ऐसी जानकारी जो पहले से किसी अन्य प्लेटफार्म पर उपलब्ध है, उनका लिंक हो।

वेब-अभिलेखागार की वेबसाइट के लिए सामग्री- दस्तावेजों/ अभिलेखों/ चित्र, छायाचित्र (फोटोग्राफ) को सर्च में आसानी और उपयोगकर्ता की सुविधा की दृष्टि से निम्नानुसार बिंदुओं में वर्गीकृत-सूचीकरण होना चाहिए- 

● भाषा- छत्तीसगढ़ी, हिन्दी, अंगरेजी, अन्य आंचलिक भाषा-बोली
● सामग्री- शासकीय पत्र (हस्तलिखित, टाइप, कम्प्यूटर प्रिंट), शासकीय प्रतिवेदन, आदेश, राजनेताओं-जनप्रतिनिधियों के पत्र, देशी रियासतों के पत्र, प्रतिवेदन, आदेश, पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएं, शोधपत्र, लेख, डायरी, परचे, चित्र, छायाचित्र (फोटोग्राफ) अन्य।
● व्यक्ति नाम- स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शहीद, अंगरेज अधिकारी, भारतीय अधिकारी, रियासतों, जमींदारियों के प्रमुख, नागरिक अन्य।
● स्थान नाम- प्रशासनिक इकाई, ग्राम नाम, अंचल-क्षेत्र का नाम, भौगोलिक इकाई का नाम, अन्य।
● काल- सन् वर्षवार (यथाआवश्यक कालक्रम में मास एवं तिथिवार) के साथ/अतिरिक्त दशक, सदी के चतुर्थांश, आधी सदी में तथा सदी में विभक्त हो।
● घटना- यथाआवश्यक ऐतिहासिक महत्वपूर्ण घटनाओं यथा कंडेल नहर सत्याग्रह, बीएनसी मिल हड़ताल, रायपुर षड़यंत्र केस इसी प्रकार अन्य उल्लेखनीय घटनाओं, जिसमें प्राकृतिक आपदा, उपलब्धि आदि हों, को पृथक लेबल में।
● इसी प्रकार विशिष्टता, विषय-क्षेत्र यथा भूगोल, प्राकृतिक संसाधन, वन-वन्य जीवन, जनजातीय समुदाय, पुरातत्व, लोक-जीवन, समाजार्थिक गतिविधियां आदि।

प्राथमिकता- सन 1950 तक की काल-अवधि तथा छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण से संबंधित सामग्री के डिजिटाइजेशन-स्कैन एवं अपलोड करने की प्राथमिकता हो, किन्तु इस क्रम में उपलब्ध होने वाली अन्य उपयुक्त सामग्री को भी यथा-अवसर अपलोड करने हेतु डिजिटाइज किया जाना। यह ध्यान रखना होगा कि दुर्लभ, जिसकी अन्य/अधिक प्रतियां होने की संभावना न हो, वलनरेबल सामग्री के डिजिटाइजेशन को उच्च प्राथमिकता में रखना होगा। यह भी ध्यातव्य होगा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक और प्रशासनिक सीमाएं बदलती रही हैं, इसलिए छत्तीसगढ़ से संबंधित संलग्न क्षेत्रों की सामग्री भी इसमें होना उपयुक्त होगा।
ऐसे प्रकाशन भी अब
दस्तावेजी महत्व के हैं।

इसके साथ राज्य की लोक एवं जनजातीय सांस्कृतिक पहचान के विभिन्न पक्ष, रामलीला, नवधा, रामसप्ताह, रहंस आदि परंपरागत प्रस्तुतिपरक विधाएं, लोकगीत, प्राचीन साहित्य, स्वाधीनता संग्राम से संबंधित दस्तावेज आदि तथा इससे संबंधित उपलब्ध तथा एकत्र की गई जानकारी को निर्घारित वर्गीकरण के अनुरूप अपलोड किया जाना उपयोगी और आवश्यक होगा।

इसी प्रकार, उदाहरणस्वरूप- छत्तीसगढ़ी दानलीला, खुसरा चिराई के बिहाव, छत्तीसगढ़ी मेघदूत, छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, छत्तीसगढ़ के जिला गजेटियर 1910, फ्युडेटरी स्टेट गजेटियर तथा मध्यप्रदेश में तैयार किए हुए, रतनपुर गुटका, वीर नारायण सिंह की फांसी आदेश की प्रति, जगन्नाथ प्रसाद भानु, ठाकुर जगमोहन सिंह, लोचन प्रसाद पांडेय के प्रकाशन, ए. कनिंघम की रिपोर्ट, प्रथम सेटलमेंट रिपोर्ट आदि जैसी सामग्री प्राथमिकता से अपलोड किया जाना उचित होगा।

साथ ही ध्यातव्य कि वर्तमान के दस्तावेज ही भविष्य में अभिलेख होंगे, ऐसे दस्तावेजों का अभी संकलन आसान होगा। अतएव इस दृष्टि समकालीन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को डिजिटाइज कर, एकत्रित रखना उचित होगा, जिसे यथोचित अवसर पर अपलोड किया जाना। उदाहरणस्वरूप शासन के राजपत्रों को प्रकाशन के साथ इस प्लेटफार्म पर अपलोड करना उपयोगी होगा। इसी प्रकार जनसंपर्क तथा अन्य विभिन्न विभागों, अर्द्धशासकीय प्रतिष्ठान, निगम-मंडल द्वारा अथवा इनके वित्तीय सहयोग से प्रकाशित सामग्री, विभागों के वार्षिक प्रशासकीय प्रतिवेदन आदि के साथ-साथ वेब-अभिलेखागार के निर्माण संबंधी आरंभिक आदेश आदि भी ऐसे दस्तावेज हैं, जिन्हें आरंभ में ही अपलोड किया जा सकता है।

अन्य स्रोत- छत्तीसगढ़ से संबंधित ऐसी सामग्री, जो अन्य किसी वेबसाइट, प्लेटफार्म पर उपलब्ध है, उसके लिए संदर्भ खंड बना कर लिंक दिया जा सकता है, किन्तु यह निर्भरता की स्थिति होगी अर्थात् अन्य स्रोत के निष्क्रिय हो जाने अथवा बाधित हो जाने अथवा सामग्री हटा लिये जाने की स्थिति में ऐसी सामग्री की उपलब्धता नहीं रहेगी, इसलिए ऐसी संबंधित समस्त सामग्री, जो अन्य स्रोतों पर हैं, उन्हें भी छत्तीसगढ़ वेब-अभिलेखागार पर ला कर, इसे सर्वाधिक संपन्न और विश्वसनीय ‘वन स्टॉप साइट‘ बनाने का प्रयास किया जाना।

मूल स्रोत और योगदानकर्ता- सामग्री के साथ यह जानकारी भी एकत्र कर आंतरिक स्तर पर रखनी होगी कि डिजिटाइज सामग्री का मूल किस व्यक्ति, संस्था, कार्यालय, स्थान में संधारित है और उसके संरक्षण की स्थिति कैसी है। इसी प्रकार डिजिटाइज करने वाले शासकीय/अशासकीय, जन-सामान्य, स्वयं संधारक आदि श्रेणी में जानकारी रखनी आवश्यक होगा।

प्रत्याख्यान (डिस्क्लेमर)- वेब-अभिलेखागार में अपलोड कर, सार्वजनिक की जाने वाली सामग्री ऐतिहासिक दस्तावेज-अभिलेखों का पुनः प्रकटीकरण मात्र है न कि नई मौलिक जानकारी। यह दस्तावेजों को सुरक्षित रखते हुए, मानव सभ्यता और राज्य के इतिहास, संस्कृति संबंधी जानकारी को अक्षुण्ण बनाए रखने का प्रयास होगा, जिसका उद्देश्य गैर-व्यावसायिक, शोध-अकादमिक, सभ्यता के विभिन्न पड़ाव के तथ्यों एवं विकास की रूपरेखा के लिए आधार सामग्री है। संभव है कि इसमें कुछ सामग्री कॉपीराइट सीमा में हो, तथा ऐसी ऐतिहासिक जानकारी, शब्द, कथन, अभिव्यक्ति हो, जो किसी वर्ग, समूह, व्यक्ति द्वारा आपत्तिजनक मानी जावे, किंतु दस्तावेज-अभिलेखों के ऐतिहासिक, मात्र पुनः प्रकट किए जाने तथा उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुए ही इनकी प्रस्तुति होगी, फिर भी आपत्ति होने पर सक्षम स्तर पर विचार किया जा सकेगा। 

प्रसंगवश- मीडिया के हवाले से जानकारी मिली थी कि इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री जी के स्तर पर अप्रैल 2021 में सकारात्मक निर्णय ले लिया गया है, जिसमें उल्लेख है कि ‘संस्कृति विभाग से हाल ही में सेवानिवृत्त अधिकारी श्री राहुल सिंह की सहायता इस कार्य में ली जाये‘ किंतु आगामी कार्यवाही अब तक विचाराधीन है अथवा इसमें प्रगति की सूचना मुझे किसी स्रोत से प्राप्त नहीं हुई है। 
अब मानता हूं कि अपने समय को, संचित और प्रारब्ध की दृष्टि से क्रियमाण रखना, स्वयं के लिए आवश्यक है, शायद लोगों-समाज के लिए भी काम का हो। ऐसी स्थिति में अपने स्तर पर जो संभव है, वह मेरे ब्लॉग ‘सिंहावलोकन‘ पर ऐसी जानकारी-सामग्री लाना, जो छत्तीसगढ़ के इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति, साहित्य, कला से संबंधित है, अल्पज्ञात हो, सुलभ न हो, उसे प्रकट कर, सार्वजनिक करते हुए संरक्षित करना। इसके अतिरिक्त ऐसे प्रकाशन का पीडीएफ तैयार करना, प्राप्त करना और उसे समान रुचि वालों के बीच बांट कर फैलाना। प्रयास होगा कि ‘वय-वानप्रस्थ‘ से आरंभ यह क्रम ‘वय-संन्यास‘ तक तो निरंतर रहे ही।

आभार- ‘सिंहावलोकन‘ की शुरुआत पा.ना. सुब्रह्मनियन जी ने कराई। उस दौर के धाकड़ ललित शर्मा जी, संजीव तिवारी जी, जी.के. अवधिया जी और बी.एस. पाबला जी, तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन देते रहे।