छत्तीसगढ़ : जिला सिलसिला

छत्तीसगढ़ में छत्तीस जिले बन जाने की संभावना पर पिछले कुछ महीनों से बात हो रही है। इसके लिए 2023 में होने वाले विधानसभा आम चुनाव के पहले इन इकाइयों में परिवर्तन की रोक की समय सीमा रेखा मानी जा रही है। बहरहाल, अब तक छत्तीसगढ़ के जिलों के गठन पर एक नजर, निवेदन सहित कि यहां प्रास्तुत जानकारी उपलब्ध स्रोतों के आधार पर यथासंभव पुष्टि कर संयोजित हैं, किंतु अधिकृत प्रयोजन हेतु मूल स्रोतों को देख लेना आवश्यक है, साथ ही किसी परिवर्तन के लिए सुझाव मिलने पर यथाअवसर आवश्यक अद्यतन, संशोधन-परिवर्धन कर लिया जावेगा-

1854/1857 पहला जिला
#01 रायपुर

1861-1862 – 1+1 जिला - 2
#02 बिलासपुर

01 जनवरी 1906 - 2+1 जिला - 3
#03 दुर्ग

01 जनवरी 1948 - 3+3 जिला - 6
#04 सरगुजा (मुख्यालय-अंबिकापुर)
#05 रायगढ़
#06 बस्तर (मुख्यालय-जगदलपुर)

26 जनवरी 1973 - 6+1 जिला - 7
#07 राजगांदगांव

01मई 1998 - 7+4 जिला - 11
#08 कोरबा - 25 मई
#09 जांजगीर-चांपा (मुख्यालय-जांजगीर) - 25 मई
#10 जशपुर (मुख्यालय-जशपुर नगर) - 25? मई
#11 कोरिया (मुख्यालय-बैकुंठपुर) - 25 मई

01/06 जुलाई 1998 - 11+5 जिला - 16
#12 महासमुंद
#13 धमतरी - 06 जुलाई
#14 कांकेर
#15 कबीरधाम (मुख्यालय-कवर्धा) - 06 जुलाई
#16 दंतेवाड़ा

01 मई 2007 - 16+2 जिला - 18
#17 नारायणपुर
#18 बीजापुर

01 जनवरी 2012 - 18+9 जिला - 27
#19 बालोद - 10 जनवरी
#20 गरियाबंद - 11 जनवरी
#21 मुंगेली - 12 जनवरी
#22 बेमेतरा - 13 जनवरी
#23 सुकमा - 16 जनवरी
#24 बलरामपुर-रामानुजगंज - 17 जनवरी (मुख्यालय- बलरामपुर)
#25 बलौदाबाजार-भाटापारा - 18 जनवरी (मुख्यालय- बलौदाबाजार)
#26 सूरजपुर - 19 जनवरी
#27 कोण्डागांव - 24 जनवरी

10 फरवरी 2020 - 27+1 जिला - 28
#28 पेन्ड्रा-गौरेला-मरवाही (मुख्यालय- पेन्ड्रा)

02-09 सितंबर 2022 - 28+5 जिला - 33
#29 मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी - 02 सितंबर (मुख्यालय- मोहला)
#30 सारंगढ़-बिलाईगढ़ - 03 सितंबर (मुख्यालय- सारंगढ़)
#31 खैरागढ़-छुईखदान-गंडई - 03 सितंबर (मुख्यालय- खैरागढ़)
#32 मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर - 09 सितंबर (मुख्यालय- मनेन्द्रगढ़)
#33 सक्ती - 09 सितंबर


इस सिलसिले में इतिहास और अधिकृत स्रोतों का उल्लेख समीचीन होगा-

1751 में छत्तीगढ़ अंचल कलचुरियों से मराठों के अधीन आ गया। 1818 में कैप्टन एडमंड्स के साथ ब्रिटिश अधिसत्ता का आरंभ हुआ, जिस क्रम में मेजर एग्न्यू 1818 से 1826 तक प्रभारी रहे और इस दौरान वर्तमान प्रशासनिक पृष्ठभूमि-सूत्रपात हुआ। कुछ अंतराल के बाद 1853-54 में छत्तीसगढ़ पुनः ब्रिटिश राज्य-क्षेत्र (टेरिटरी) बना। 1861 में बिलासपुर, रायपुर से अलग हो कर पृथक जिला बना। 1905 तक छत्तीसगढ़ संभाग में रायपुर और बिलासपुर के साथ संबलपुर जिला भी था, जो बंगाल-उड़ीसा? के अंतर्गत चला गया और सरगुजा छत्तीसगढ़ में शामिल हुआ। 1906 में दुर्ग जिले का गठन हुआ।

1909 में रायपुर, बिलासपुर औैर दुर्ग का जिला गजेटियर और छत्तीसगढ़ फ्यूडेटरी स्टेट गजेटियर प्रकाशित हुआ। इनमें जिला गजेटियरों का संक्षेप, अद्यतन करते हुए हिंदी गजेटियर प्रकाशित हुए, जिनमें 1921 में गोकुलप्रसाद का ‘दुर्ग दर्पण‘, 1923 में प्यारेलाल गुप्त का ‘बिलासपुर वैभव‘ और 1925 में गोकुलप्रसाद का ‘रायपुर रश्मि‘ आया। इसी प्रकार देशी रियासतों में पं. केदारनाथ ठाकुर का ‘बस्तर-भूषण‘ 1908 में आ गया था। 1925 में धानूलाल श्रीवास्तव का ‘अष्टराज अम्भोज‘ आया, जिसमें कांकेर, राजनांदगांव, खैरागढ़, छुइखदान, कवर्धा, सक्ती और सारंगढ़ शामिल थे। 1930 में रघुबीरप्रसाद का ‘झारखंड झनकार‘ आया, जिसमें अन्य पांच, अर्थात सरगुजा, उदयपुर, जशपुर, कोरिया और चांगभखार शामिल थे।

पुनः मध्यप्रदेश शासन, भोपाल के जिला गजेटियर विभाग/ गजेटियर संचालनालय/ संस्कृति विभाग से जिला गजेटियर दुर्ग 1972 में (राजनांदगांव परिशिष्ट सहित), रायपुर 1973 में, रायगढ़ 1976 में, बिलासपुर 1978 में, सरगुजा 1989 में बस्तर 2000 (सभी अंगरेजी) में प्रकाशित हुआ। पुनः हिंदी संस्काण गजेटियर रायगढ़ 1979 में, दुर्ग-राजनांदगांव 1980 में (एवं अनुपूरक 1996 में), बिलासपुर तथा रायपुर 1992-93 में, सरगुजा 1998 में प्रकाशित हुआ।

ब्रिटिशकालीन जिला गजेटियरों का पुनर्मुद्रण संचालनालय, राजभाषा एवं संस्कृति की गजेटियर इकाई द्वारा 1997 में रायपुर जिला तथा 1998 में बिलासपुर जिला व दुर्ग जिला का गजेटियर आया। हिंदी गजेटियरों में बस्तर भूषण का प्रकाशन निजी संस्थानों द्वारा भी किया गया तथा राजभाषा एवं संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश, भोपाल द्वारा 2000 में पुनर्मुद्रण कर प्रकाशित किया गया। पुनः इनका पुनर्प्रकाशन छत्तीसगढ़ राज्य हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा 2017 में दो भाग में किया गया, जिसके भाग-1 में बस्तर भूषण, अष्टराज अम्भोज और झारखंड झनकार है। भाग-2 में दुर्ग दर्पण, बिलासपुर वैभव और रायपुर रश्मि है।

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