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Sunday, October 30, 2011

हमला-हादसा

18 अक्टूबर की शाम लखनऊ में घटित, अरविंद केजरीवाल वाली घटना के बाद समाचारों में हमला और हादसा शब्द बार-बार आने लगा।
घटना, हमला और हादसा न कही जाए तो समाचारों की दुनिया सूनी होने लगती है शायद, क्योंकि बात चप्पल-जूते चलने तक हो तो यह कोई समाचार हुआ, वह तो कहीं भी, कभी भी हो जाता है।
अखबारों में यह खबर मुखपृष्ठ पर प्रमुखता से छापी गई थी, लेकिन (गनीमत रही कि) एक अखबार जो हमला-हादसा शब्द से बच रहा था, वह 'चप्पल चला दी' और 'चप्पल फेंक कर मारी' तक सीमित रहा, किन्‍तु इस अखबार में खबर एक कालम में सिमट गई है।

खबरों में बताया गया है कि अन्ना ने इसे लोकतंत्र पर हमला कहा है। यह भी कि श्री केजरीवाल पर हमले के बाद जितेंद्र की इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्यों ने जम कर पिटाई की। बाद में श्री केजरीवाल ने हमलावर को माफ भी कर दिया।
इस संदर्भ में कुछ सवाल हैं-
? हमला, हादसा और हमलावर शब्द का इस्तेमाल,
? घटना को लोकतंत्र पर हमला कहा जाना,
? इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्यों द्वारा जितेंद्र की जम कर पिटाई,
? पीटने वाले सचमुच इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य थे,
? ऐसी जम कर पिटाई भी 'हमला' कही जा सकती है,
? जितेंद्र की पिटाई पर वक्‍तव्‍य/कार्रवाई।

ऐसा हर ''हमला-हादसा'' मेरी दृष्टि में असहमति-योग्‍य है।

इस बीच यह भी खबर है कि 6 नवम्‍बर 2001 को नागपुर में अरविंद केजरीवाल का भाषण हुआ और इस मौके पर 'घंटानाद' संस्‍था के कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध किए जाने पर उनके कार्यकर्ताओं ने विरोधियों की जम कर पिटाई की है।
(समाचार पत्र 'आज की जनधारा', रायपुर के ब्‍लॉगकोना स्‍तंभ में 27 नवंबर 2011 को प्रकाशित)