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Saturday, June 6, 2026

सौंदर्य का राज

‘पुष्पा हंस‘ नाम कभी बचपन में सुना था, माना लिया था कि काल्पनिक होगा, अब खोजबीन में पता लगा कि पिछली सदी के पांचवें-छठें दशक की गायिका-अदाकारा थीं। इतनी नामचीन, कि लक्स के विज्ञापन में भी आती थीं। 

जी हां, लगभग 35-40 साल का दौर ऐसा था कि अभिनेत्री, तब तक टॉप की नहीं मानी जाती थी, जब तक विज्ञापन कर वह यह खुलासा न कर दे कि उसके सौंदर्य का राज ‘लक्स‘ है, जो सौंदर्य और त्वचा की रक्षा करता है। इतने के बाद स्वाभाविक कि ‘लक्स‘ द्वारा खुद से खुद को, चित्र तारिकाओं का सौंदर्य साबुन कहा गया। पुराने जमाने में वे इससे ‘अपनी त्वचा की रक्षा करती‘ और उत्कृष्ट बताई जाती थीं, यह साबुन सौंदर्य रक्षक होता था, सुरैया जैसी गायिका-नायिका आभार व्यक्त करती थीं। लक्स विज्ञापन वाले हेमामालिनी और माधुरी दीक्षित तक के चित्र जेहन में अब भी हैं। हां, तब लक्स टॉयलेट साबुन होता था, यानि कपड़ा धोने से अलग, नहाने का साबुन। अब तो टॉयलेट ‘छिः छिः‘ हो गया है। 

बहरहाल, ‘आदमी वो है, जो मुसीबत से परेशां न हो‘, ‘चांद-सूरज को भी लग जाता है इक बार ग्रहण‘ और ‘ये है दुनिया, यहां दिन ढलता है शाम आती है, सुबह हर रोज नया नया ले के पयाम आती है‘ जैसी पंक्ति वाला, 1950 की सोहराब मोदी की फिल्म ‘शीश महल‘ में पुष्पा हंस का गाया गीत यू-टयूब पर जा कर सुन सकते हैं।