हमारा छत्तीसगढ़
प्रतिवेदन - एल.एस. निगम एवं राहुल कुमार सिंह
संबंधित पाठ-
कक्षा-3 1, 3 एवं 7
कक्षा-4 1, 3 एवं 7
कक्षा-5 1, 2 एवं 3
कक्षा-6 1, 3, 8 एवं (10)
कक्षा-7 1, एवं 8
कक्षा-8 1, 11 एवं 15
सामान्य अभ्युक्ति-
1. ‘हमारा छत्तीसगढ़’ पुस्तकमाला की सामान्य अवधारणा, विषय-वस्तु और सामग्री-चयन, सामान्यतः प्रशंसनीय और स्वागतेय है।
2. प्राथमिक और पूर्व-माध्यमिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में बच्चों की पीठ पर बढ़ते बस्ते के बोझ की चिन्ता सदैव की जाती है। इस दृष्टि से अत्यावश्यक माने जाने वाले क्षेत्रों के लिए पृथक-पृथक पाठ्य-पुस्तकों के बजाय नियमित पाठ्यक्रम के ‘भाषा’, ‘सामाजिक अध्ययन’ और ‘विज्ञान’ विषयों के साथ क्रमशः सहायक-वाचन (आंचलिक विशिष्टता और गौरव), पर्यावरण तथा सूचना-प्रौद्योगिकी के पाठ जोड़ा जाना उपयुक्त होगा। इससे बस्ते के बोझ के साथ-साथ अभिभावकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम होगा।
3. पाठ तैयार करने में यह ध्यान रखना अत्यावश्यक है कि पाठ्य-सामग्री का गहन और सूक्ष्म निरीक्षण, विषय-विशेषज्ञों, भाषा-विशेषज्ञों तथा बाल-शिक्षा मनोविज्ञानियों द्वारा किया जाए।
4. हमारा छत्तीसगढ़ पुस्तकमाला के अधिकतर पाठों के लेखक और सम्पादक डा. श्याम सुंदर त्रिपाठी यदि एक ही व्यक्ति हैं, तो यह स्थिति उचित नहीं है, क्योंकि इससे पाठों में आवश्यक संशोधन प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है।
5. पाठ को ‘किरण’ कहने पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
कक्षा और पाठवार टिप्पणी/संशोधन सुझाव-
कक्षा-3 पाठ 1, 3 एवं 7
पृष्ठ-2 नक्शे में सभी जिले दर्शित हैं, अतः प्रमुख शब्द अनावश्यक है।
पृष्ठ-4 प्राचीनता के क्रम में ‘है’ के स्थान पर ‘माना जाता है’, उपयुक्त होगा।
पृष्ठ-10 ‘देवलदेव’ के स्थान पर ‘भांडदेवल’ होना चाहिए।
पृष्ठ-11 ‘शिवरीनारायण’ के बाद जांजगीर-चांपा जिले के चन्द्रपुर की चन्द्रहासिनी देवी का तत्पश्चात्, रायगढ़ जिले का उल्लेख, उचित होगा।
पृष्ठ-12 कविता की पंक्तियों का पुनः मिलान उचित होगा।
पृष्ठ-33 दूरी, वृक्षों के नाम, पुनः मिलान करना उचित होगा। सतयुग के साथ शायद शब्द का प्रयोग उपयुक्त नहीं है।
पृष्ठ-34 ‘पागल जैसे हो गए’ को अन्य प्रकार से लिखा जाना उचित होगा।
पृष्ठ-37 वाद्यों के नामों को पुनः जांच लेना आवश्यक है।
कक्षा-4 पाठ 1, 3 व 7
पृष्ठ-1 ‘कौशल’ और ‘विनताश्व’ शब्दों की वर्तनी जांचना आवश्यक है।
पृष्ठ-2 ‘दहेज में उत्तर कौशल’ वाक्य की जांच आवश्यक है।
‘वाल्मिकी’ और ‘राम’ के साथ ‘श्री’ आवश्यक नहीं है।
‘वृह्दबल’ की वर्तनी जांचना आवश्यक है।
‘बुन्देलखण्ड के शहडोल’ के औचित्य पर विचार करना उचित होगा।
पृष्ठ-3 ‘कान्तर’ के स्थान पर ‘कान्तार’ होना चाहिए और विदर्भ के साथ बरार का उल्लेख भी उचित होगा।
पैरा 2 व 3 का पुनर्लेखन उपयुक्त होगा, जिसमें विद्वानों के मतभेद के बजाय अधिकतर मान्य तथ्य उल्लिखित होे।
पृष्ठ-4/5 गढ़ स्थान नामों को पुनः जांचना आवश्यक है।
पृष्ठ-6 गढ़ों का प्रशासनिक केन्द्र होना और भौतिक स्वरूप वाले गढ़ का अन्तर स्पष्ट करना चाहिए।
‘राष्ट्रगीत’ और ‘राष्ट्रगान’
पृष्ठ-14 कोशला ग्राम का उल्लेख भ्रामक है।
‘श्री’ अनावश्यक है।
‘रानकावति’ वर्तनी की जांच आवश्यक है।
पृष्ठ-17 राजिम तेलिन, जगतपाल, भगवान विष्णु, चौदहवीं शताब्दी- इन उल्लेखों में तथ्य और मान्यता का घालमेल है। ‘बड़े मंदिर’ शब्द उपयुक्त नहीं है।
पृष्ठ-18 ‘स्कन्ध’ के स्थान पर ‘स्कन्द’ शब्द होना चाहिए।
पृष्ठ-19 ‘धौम्य’ की वर्तनी जांचनी है।
‘ऋषियों के आश्रम आज भी’ उपयुक्त नहीं है।
मन्दिरों की संख्या ‘बाइस’ की जांच आवश्यक है।
पृष्ठ-37 ‘मन्दाकिनी’ नाम के समीकरण की जांच आवश्यक है।
पृष्ठ-39 श्लोक का पुनः मिलान उचित होगा।
‘थुआमाल’ की वर्तनी की जांच आवश्यक है।
‘मील’, ‘किमी’ के बजाय ‘किलोमीटर’ लिखना व माप का उल्लेख उपयुक्त होगा।
‘चन्द्रमा की आकृति’ अथवा ‘अर्द्धचन्द्राकार’ जांच आवश्यक है।
पृष्ठ-40 ‘कालीदास’ अथवा ‘कालिदास’ वर्तनी के साथ संदर्भ की जांच आवश्यक है।
‘रावा घाट’ वर्तनी/उच्चारण की जांच आवश्यक है।
पृष्ठ-41 ‘मैय्या’ के बजाय ‘मैया’ होना चाहिए।
‘पुस्तक माला के भाग एक’ उल्लेख उचित नहीं है।
पृष्ठ-42 जगदलपुर के दंतेश्वरी मंदिर का दन्तेवाड़ा से अलग होना, स्पष्ट करना चाहिए।
‘नारायण पाल’ और ‘नाग कालीन’ मिलाकर लिखना उपयुक्त होगा।
कक्षा-5 पाठ 1, 2 व 3
पृष्ठ-1 ‘छत्तीसगढ़ की काशी’ रतनपुर के लिए पूर्व प्रचलित है।
पृष्ठ-5 ‘सूर्य वर्मा’ के बजाय ‘सूर्यवर्मा’ उचित होगा।
‘स्वास्तिक’ के बजाय ‘स्वस्तिक’ होना चाहिए, जो बौद्ध विहार है। अन्य बौद्ध विहार का नाम आनन्दप्रभ कुटी विहार है।
पृष्ठ-6 ‘महात्मा बुद्ध के प्रिय शिष्य’ उल्लेख उचित नहीं है। ‘आनन्द प्रभु’ की वर्तनी उपरोक्तानुसार होगी।
पृष्ठ-8 पाठ ‘कथा श्रृंगी ऋषि की’ के औचित्य पर पुनर्विचार आवश्यक है।
पृष्ठ-15 ‘मध्यप्रदेश’ के स्थान पर ‘मध्यप्रान्त’ होना चाहिए।
‘चौहान वंशीय’ के स्थान पर ‘चौहानवंशी’ होना चाहिए।
पृष्ठ-17 ‘हजारी बाग’ के स्थान पर ‘हजारीबाग’ होना चाहिए।
कक्षा-6 पाठ 1, 3, 8 व (10),
कक्षा-7 पाठ 1, व 8,
कक्षा-8 पाठ 1, 11, व 15
पर चर्चा के दौरान प्रतिवेदकों द्वारा टिप्पणियां की गईं।