Sunday, August 14, 2022

वीर नारायण सिंह

शहीद वीर नारायण सिंह की फांसी, फांसी-स्थल, चित्र आदि के बारे में पूछ-परख होती रहती है और बार-बार कई भ्रामक जानकारियां आती रहती हैं। इसलिए यहां कुछ मुख्य तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जा रहा है। माना जाता है कि शहीद वीर नारायण सिंह, गुरु बाबा घासीदास और पं. सुंदरलाल शर्मा की चर्चा 1980 के बाद अधिक होने लगी। पी. साईनाथ की सोनाखान मौके की, टाइम्स ऑफ इंडिया में 1997 में प्रकाशित रपट भी खासी चर्चा में रही थी।

संबंधित आदेशों की प्रति


डाक टिकट, जिसके कारण भ्रम की स्थिति बनी।
बताया जाता है कि विज्ञप्ति जारी कर
डाक-तार विभाग ने इस भूल पर खेद जताया था।
यदि ऐसा नहीं हुआ था, तो ससंकोच कि
अभी तक क्यों नहीं? पहल करने की आवश्यकता है।
और यह भी नहीं तो इस भूल को दुहराने से तो बचें।

सोनाखान के शहीद वीर नारायण सिंह की तस्वीर,
जिसे राजस्थान के ठाकुर नारायण सिंह की तस्वीर में मामूली फेर-बदल कर बनाया गया है।
वर्तमान में यही तस्वीर स्वीकृत-मान्य है, जबकि वीर नारायण सिंह के वंशजों की तस्वीर के आधार पर
अब कम्प्यूटर साफ्टवेयर की सहायता से इस आदिवासी नायक की तस्वीर तैयार कराया जाना चाहिए।

पुराने सर्किट हाउस, वर्तमान राजभवन का चौक,
जहां वीर नारायण सिंह के स्मारक स्वरूप कलाकृति कर लोकार्पण,
तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी ने किया था,
जो अब लगभग भुला दी गई है।
फांसी का स्थान डीकेएस भवन के पीछे
जेल-बैरक भवन के आसपास का कोई स्थान रहा होगा
किंतु अब सामान्यतः वह स्थान आजादी के बाद स्थापित
जय स्तंभ चौक को मान लिया जाता है।

छत्तीसगढ़ के इतिहास से संबंधित ऐसे कई तथ्य हैं, जो उपेक्षित हैं, नजर-अंदाज हैं या सुविधापूर्ण व्याख्या के साथ, भ्रामक रूप में धड़ल्ले से प्रचलित हैं। आवश्यकता है कि अपने इतिहास के गौरवशाली पन्नों को तथ्य, मूल-प्राथमिक स्रोत और आधार के सहारे सार्वजनिक और स्थापित किया जाय। इतिहास संशोधन के लिए अपने पसंद का इतिहास नहीं, बल्कि प्रयास कर तथ्यात्मक जानकारियों वाला विश्वसनीय इतिहास तैयार करना आवश्यक होता है। 
डी के अस्पताल के पीछे,
वर्तमान स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय से संलग्न भवन,
पुराना जेलखाना, जहां वीर नारायण सिंह कैद रहे होंगे।।


5 comments:

  1. Seems to be a truly big task demanding comprehensive coordination of different segments of prevalent technical skills...

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  2. साथ ही सोनाखान जमीदारी के समय के देवरी ,कटगी लवन बिलाईगढ़ आदि जमीदारी के भी शायद पर्याप्त जानकारी नही मिलती !

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  3. निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ के इतिहास खासकर वीर नारायण सिंह से संबंधित तथ्यों को जो संभवतया एक पक्षीय है उसे सही विश्लेषण के साथ पेश किया जाना चाहिए। माखन कौन है जिसे सूदखोर बताया गया है, वास्तव में उनकी क्या स्थिति है, उसे लिखा जाना चाहिए।

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  4. राहुल भैया से शत-प्रतिशत सहमत

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