प्रस्तावना
छत्तीसगढ़ की पावन धरा आदिकाल से ही आध्यात्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण रही है। इस धरा पर जन्में और पुष्पित पल्लवित हुए सामाजिक, सांस्कृतिक आंदोलन पूरे भारत वर्ष के लिए प्रेरणा के स्रोत बने और इसी से मार्गदर्शन प्राप्त कर देश के अन्य भागों में सामाजिक उन्नयन और सांस्कृतिक समुच्चयन के कार्य हुए। आधुनिक भारत के नवजागरण में भी छत्तीसगढ़ की रचनात्मक ऊर्जा एवं अस्मिता की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदा से ही अनोखी और निराली रही। अनादिकाल से छत्तीसगढ़ रचनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण एक ऐसे भूभाग के रूप में आलोकित रहा जिसका प्रकाश यत्र-तत्र सर्वत्र फैलता रहा।
छत्तीसगढ़ की इसी रचनात्मक ऊर्जा और सामाजिक उन्नयन का परिचय यहां की पत्रकारिता में भी देखने को मिलता है, जिसका अस्तित्व इसके प्रारब्ध से ही निराला रहा। छत्तीसगढ़ के पहले समाचार पत्र के रूप में ख्यात और सर्वज्ञात ‘छत्तीसगढ़ मित्र‘ सन् 1900 में पेंड्रा रोड से पं. माधवराव सप्रे द्वारा अपने दो अन्य मित्रों पं. रामराव चिंचोलकर और पं. वामनराव लाखे के सहयोग से निकाला गया। इस पत्र का नाम छत्तीसगढ़ मित्र होना ही इस राज्य की रचनात्मक मेधा और अस्मिता का परिचायक है। उसके बाट कबीर पंथी (रायपुर, 1913), कान्यकुब्ज नायक (रायपुर, 1919), विकास (बिलासपुर, 1925), ‘उत्थान‘ और ‘आलोक‘ (1925), ‘सरगुजा संदेश‘, ‘कांग्रेस पत्रिका‘ और ‘सचेत‘ (1937), अग्रदूत (1942), महाकौशल (1935) पत्रकारिता की अनवरत् श्रृंखला को रेखांकित करते दीप स्तंभ है।
समाचार पत्रों की इस यात्रा के दौरान इस धरा पर कलम के अनेक योद्धा पैदा हुए जिन्होंने अपनी धारदार लेखनी के जरिये समाज में नई चेतना और ऊर्जा का संचार किया। वे ऐसे महामना थे जिन्होंने अपने निजी स्वार्थ और निजी विकास को परे रखकर देशहित और समाज हित के प्रति अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
विश्वविद्यालय द्वारा विगत वर्ष पत्रकारिता के ऐसे पुरोधाओं का स्मरण करते हुए पहला मोनोग्राफ ‘हमारे पुरोधा‘ खण्ड-1 निकाला था, जिसमें पं. माधवराव सप्रे, पं. रविशंकर शुक्ल, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, कुलदीप सहाय, यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव, केशव प्रसाद वर्मा, गजानन माधव मुक्तिबोध, पं. स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी, चंदूलाल चंद्राकर, मायाराम सुरजन और हरि ठाकुर का समावेश था। ऐसे ही कुछ और पुरोधाओं पर केन्द्रित दूसरा खण्ड अब सादर समर्पित है। हमारा प्रयास है कि और अधिक जानकारी एकत्रित कर हम ऐसे ही पुरोधाओं पर कुछ और खण्ड प्रकाशित करें। हमने यथासंभव अधिक से अधिक जानकारी एकत्रित करने का प्रयास किया है, फिर भी किसी महत्वपूर्ण जानकारी अथवा ऐसे कुछ महानुभावों का उल्लेख अवश्य छूट गया होगा, जिसका समावेश होना चाहिये था। इसके लिए सभी पुरोधाओं का श्रद्धापूर्वक स्मरण कर उनके प्रति हम क्षमा याचना अर्पित करते हैं।
यह मोनोग्राफ हमारी विनम्र श्रद्धांजलि हैं, रचनात्मकता के उन वीरों के नाम जिनके आशीर्वाद से आज छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता नई ऊंचाईयों को छू रही है और नवगठित राज्य की विकासयात्रा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
सच्चिदानंद जोशी
कुलपति
हमारे पुरोधा: खण्ड-2 में 12 पुरोधाओं की संक्षिप्त जानकारी इस प्रकार है-
नाम - जन्म/मुख्य कर्मभूमि, जन्म-निधन तिथि
# बारीन्द्रनाथ बैनर्जी - /रायगढ़, 19.11.1916-20.09.2006
# पं. रामाश्रय उपाध्याय ‘वक्रतुण्ड‘ - बिहार/रायपुर, 02.08.1917-05.02.2005
# पं. शिवनारायण द्विवेदी - उत्तरप्रदेश/रायपुर, 20.07.1920-20.01.1999
# मधुकर खेर - रायपुर, 21.02.1928-31.03.1996
# केशवलाल मेहता - /कोरबा, 01.02.1929-05.02.2009
# कुमार साहू - मध्यप्रदेश/रायपुर, 22.10.2029-22.05.2008
# श्रीकांत वर्मा - बिलासपुर/दिल्ली, 18.12.1931-1986(25 मई)
# डी.पी. चौबे - बिलासपुर, 05.02.1935-19.06.1988
# रम्मू श्रीवास्तव - लोहारा, कवर्धा/रायपुर, 19.12.1936-09.02.2006
# किरीट दोशी - /जगदलपुर, 29.11.1939-17.11.2009
# बसंत अवस्थी - रायपुर, 05.08.1940-11.07.2008
# सत्येन्द्र गुमास्ता - महासमुंद/रायपुर, 05.12.1940-13.06.1997
टीप -
0 पुस्तिका में प्रकाशन वर्ष अंकित नहीं है, यहां कोष्ठक में दर्शाया गया वर्ष 2011, अंतिम पृष्ठ पर छपे छत्तीसगढ़ संवाद के विज्ञापन February 2011 के आधार पर है।
0 पुस्तिका संपादक परितोष चक्रवर्ती स्वयं बिलासपुर से करीब से जुड़े रहे, मगर पुस्तिका में श्रीकांत वर्मा के निधन का वर्ष दिया गया है, तारीख नहीं। यहां कोष्ठक में दी गई तारीख अन्य स्रोत से ली गई है।
0 स्वयं पत्रकार रहे, परितोष जी की पहचान वामपंथी रुझान के साहित्यकार की रही। स्वाभिमानी परितोष कुछ समय भिलाई इस्पात संयंत्र में जनसंपर्क अधिकारी रहे, बाद में लंबे समय तक बिलासपुर एसइसीएल में जनसंपर्क विभाग प्रमुख का दायित्व निर्वाह किया। इस विश्वविद्यालय में उस दौर में इनकी नियुक्ति, विचारधारा के स्तर पर मेल नहीं खाती थी, चर्चा का विषय थी।
0 इस श्रृंखला का खण्ड-1 उपलब्ध नहीं हुआ है। प्राप्त होने पर वहां शामिल पत्रकार पुरोधाओं की इसी प्रकार संक्षिप्त जानकारी जोड़ी जाएगी।

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