पिछले दिनों ‘हिन्दुस्तान टाइम्स‘ के पेज पर 30 अप्रैल 2026 को शुभम पांडे के अंग्रेजी समाचार का आशय है कि- 20 लाख डॉलर मूल्य की अवलोकितेश्वर की कांस्य प्रतिमा 1939 में लक्ष्मण मंदिर के पास मिले कांस्य की विशाल धरोहरों में से एक इस प्रतिमा को रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में रखा गया था। यह प्रतिमा संग्रहालय से चोरी हो गई और 1982 तक अमेरिका में तस्करी करके ले जाई गई, और अंततः 2014 तक न्यूयॉर्क में एक निजी संग्रह में पहुंच गई। यही समाचार ‘अमर उजाला‘ के पेज पर ललित कुमार सिंह ने 01 मई 2026 को लिखा कि- अमेरिका ने लौटाई छत्तीसगढ़, रायपुर से चुराई गई कुल कीमत 20 लाख डालर की बेशकीमती ‘अवलोकितेश्वर‘ कांस्य प्रतिमा।
इसी दौरान मई पहले-दूसरे सप्ताह में संग्रहालय के पुरावशेषों के मूल दस्तावेज ‘अवाप्ति पंजियों‘ का दीमक के कारण नष्ट हो जाने की जानकारी भी आई। ऐसी स्थिति में संग्रहालय के पुरावशेषों के मिलान के लिए अवाप्ति पंजी की अन्य प्रति, पुराविदों द्वारा इस संग्रहालय के पुरावशेषों संबंधी शोधपत्र, संग्रहालय के पूर्व प्रकाशनों, लेख, समाचार तथा अन्य संबंधित कार्यालयीन अभिलेख सहायक हो सकते हैं। उक्त अवलोकितेश्वर प्रतिमा, जो रायपुर से चुराई गई बताई जा रही है, के संबंध में जानकारी कि वह कब चोरी हुई थी? चोरी की रिपोर्ट लिखाई गई थी? खोज-बीन के क्या प्रयास हुए थे आदि की जानकारी मुझे अब तक नहीं मिली है। मगर एक स्रोत जिसका हवाला नीचे दिया जा रहा है, सिरपुर की ‘अवलोकितेश्वर पद्मपाणि‘ का उल्लेख तथा चित्र उपलब्ध हुआ है, यदि यह वही प्रतिमा है तो इसका अवाप्ति पंजी क्रमांक-17, दर्शाया गया है।
महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर के पुरावशेषों संबंधी आधारभूत काम यहां सहायक संग्रहाध्यक्ष रहे बालचन्द्र जैन जी ने किया है। उन्होंने 1960 में संग्रहालय के पुरातत्व उपविभाग में संग्रहीत वस्तुओं का सूचीपत्र प्रकाशित कराया था, जिसका भाग 3, धातु-प्रतिमाएं हैं।
उक्त सूचीपत्र-पुस्तिका में बताया गया है कि रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में संग्रहीत पुरातत्त्व सामग्री के विवरणात्मक सूचीपत्र प्रकाशित करने की योजना के अनुसार (१) प्रागैतिहासिक वस्तुओं, (२) पाषाण प्रतिमाओं, (३) धातु प्रतिमाओं, (४) मृण्मूतियों, (५) सिक्कों, (६) उत्कीर्ण लेखों, (७) हस्तलिखित पोथियों और (८) शस्त्रास्त्र तथा अन्य फुटकर सामग्री के अलग अलग सूचीपत्र तैयार किये जा रहे हैं जिन में यथोक्त प्रकार की कला सामग्री के विषय में विस्तार से विवरण दिये जायंगे। प्रस्तुत सूचीपत्र इस माला का तीसरा ग्रन्थ है। इस में संग्रहालय के संग्रह की समस्त धातु प्रतिमाओं को सम्मिलित किया गया है। माला का दूसरा ग्रन्थ जिस में पाषाण प्रतिमाओं का विवरण है, इसके साथ ही अलग से प्रकाशित हो रहा है। अन्य सूचीपत्र यथासमय प्रकाशित होंगे।
पुस्तिका की विषय सूची क्रम में-
एक - बौद्ध प्रतिमाएं, जिसके अंतर्गत सभी 11 सिरपुर से प्राप्त 1. तथा 2. भूमिस्पर्शमुद्रा में बुद्ध 3. वरदमुद्रा में बुद्ध 4. अवलोकितेश्वर पद्मपाणि 5., 6. तथा 7. पद्मपाणि 8. वज्रपाणि 9. तथा 10. मंजुश्री 11. तारा का विवरण, प्रकाशन संदर्भ सहित दिया गया है।
दो - वैष्णव प्रतिमाएं, जिसके अंतर्गत 12. स्थानक विष्णु, फुसेरा।
तीन - शैव प्रतिमाएं, जिसके अंतर्गत 13. गौरी, सलखन 14. गणेश नन्दौर खुर्द।
चार - विविध, जिसके अंतर्गत 15. घण्टा का विवरण है।
परिशिष्ट -
(क) सिरपुर से प्राप्त अन्य धातु प्रतिमाएं अंतर्गत जानकारी दी गई है।
(ख) सलखन से प्राप्त अन्य धातु प्रतिमाएं अंतर्गत जानकारी दी गई है।
(ग) सिरपुर की धातु प्रतिमाओं की प्रदर्शिनी अंतर्गत 1952 में जबलपुर, 1954 तथा 1956 में नागपुर, 1956-57 में दिल्ली, पटना, वाराणसी, मद्रास, बैंगलोर, बम्बई, बौद्ध कला प्रदर्शिनी, 1957 में इन्दौर, 1958 में रायपुर तथा 1959 में विल्ला ह्यूगेल और जूरिच, सूचीबद्ध है।
साथ ही निर्देश ग्रंथ, शीर्षक के अंतर्गत कला-प्रतिमाशास्त्र के दस प्रमुख ग्रंथों की सूची है।
पुस्तिका में दस चित्र फलक भी प्रकाशित हैं।
इस संदर्भ के साथ विचारणीय, अवलोकितेश्वर प्रतिमा की अमरीका से वापसी की खबरों में-
# जारी किया जा रहा अवलोकितेश्वर का चित्र, इस सूत्रीपत्र के ‘अवलोकितेश्वर पद्मपाणि‘ चित्र से मेल नहीं खाता!
# प्रतिमा का मूल्य 19 या 20 करोड़ डालर बताया जा रहा है, इस मूल्यांकन का आधार क्या है? क्या सह मूल्य किसी अधिकृत स्रोत की जानकारी के आधार पर बताया जा रहा है, स्पष्ट नहीं है!
# रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से प्रतिमा की चोरी का वर्ष 1982 बताया जा रहा है, जबकि 1982 के दौरान ऐसी कोई घटना, पुरातत्व विभाग में इस अंचल में पदस्थ अधिकारियों अथवा पुराविदों की स्मृति में नहीं हुई थी, यह भी उल्लेखनीय है कि गत माह संग्रहालय की अवाप्ति पंजी के दीमक द्वारा नष्ट किए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक हुई है, क्या संग्रहालय के अभिलेखों में इस चोरी-गुमशुदगी का विवरण है? क्या तब कोई प्राथमिकी, आपराधिक प्रकरण बना था, उप पर किसी प्रकार की कार्यवाही की जानकारी मिलती है?
इस प्रकार अवलोकितेश्वर प्रतिमा की वापसी अपने साथ ऐसे कई अनुत्तरित प्रश्न भी साथ ला रही है।
