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Monday, September 21, 2020

गांधीजी की तलाश

सदी बीत गई, सन् 1920, जब गांधीजी आए थे। इस साल 2 अक्टूबर के आगे-पीछे, गांधीजी के छत्तीसगढ़ प्रथम प्रवास के बताए जाने वाले माह, सितंबर-दिसंबर के बीच भटकते मन ने सत्य के प्रयोग करना चाहा, यहां उसका लेखा-जोखा है। विभिन्न स्रोतों से यहां एकत्र की गई जानकारियों का उद्देश्य यह कि गांधीजी के प्रथम छत्तीसगढ़ प्रवास की तथ्यात्मक, असंदिग्ध जानकारी स्पष्ट हो सके, ताकि ‘सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय‘ तथा ऐसे अन्य प्रामाणिक स्रोतों में जहां यह सूचना दर्ज नहीं है, प्रविष्टि के लिए ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सके।

‘‘श्री रविशंकर शुक्ल अभिनंदन ग्रंथ‘‘ का प्रकाशन उनकी 79 वीं जन्म-तिथि पर अगस्त 1955 में हुआ था। सन 1920 में गांधीजी के रायपुर आने का संभवतः पहले-पहल उल्लेख यहीं हुआ है। इस ग्रंथ के जीवनी खंड में श्री रविशंकर शुक्ल के ‘मेरे कुछ संस्मरण‘ शीर्षक लेख में पेज 44 पर उल्लेख आया है कि ‘‘सन् 1920 की कलकत्ता की विशेष कांग्रेस से पूर्व महात्मा गांधी रायपुर आये थे।‘‘ इस पंक्ति के अलावा गांधीजी के रायपुर आगमन-प्रवास का कोई विवरण यहां नहीं दिया गया है। इसके पश्चात् ‘‘सन् 1920 में दिसम्बर मास में कांग्रेस का अधिवेशन नागपुर में हुआ‘‘, उल्लेख आता है। आगे उनकी 1933 की यात्रा का विवरण पर्याप्त विस्तार से है। ध्यातव्य है कि सन 1920 में कलकत्ता में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का विशेष अधिवेशन, गांधीजी की उपस्थिति में 4 से 9 सितंबर तक हुआ था, जिसमें असहयोग, हंटर कमेटी की रिपोर्ट तथा पंजाब में हुए अत्याचारों के संबंध में ब्रिटिश मंत्रिमंडल के रुख पर प्रस्ताव पारित किये गये।

‘मध्यप्रदेश संदेश‘ के 30 जनवरी 1988 अंक में सितम्बर, 1920 की 20 एवं 21 तारीख को गांधीजी की छत्तीसगढ़ यात्रा, जिसमें रायपुर, धमतरी और जाने तथा यात्रा का कारण कंडेल नहर आंदोलन, उल्लेख आया है। इसी अंक में अन्य स्थान पर धमतरी से कुरुद और कन्डेल ग्राम जाने का भी लेख है। पुनः इस अंक में श्यामसुन्दर सुल्लेरे के लेख का उद्धरण है- ‘‘21 दिसंबर, 1920 को गांधी जी रायपुर से धमतरी होते हुए कुंडेल गांव भी गए और सत्याग्रहियों से मिलकर उनके साहस की सराहना की।

अक्टूबर 1969 में मध्यप्रदेश गांधी शताब्दी समारोह समिति के लिए सूचना तथा प्रकाशन संचालनालय द्वारा ‘मध्यप्रदेश और गांधीजी‘ पुस्तक प्रकाशित की गई। प्रस्तावना में बताया गया है कि पुस्तक की सामग्री का संकलन, लेखन, सम्पादन तथा मुद्रण का कार्य श्री श्यामसुन्दर शर्मा ने किया है। पुस्तक के आरंभ में ‘‘दस ऐतिहासिक यात्राएँ‘‘ शीर्षक लेख है, जिसमें बताया गया है कि ‘‘सन् 1920 में रायपुर तथा धमतरी की यात्रा में भी मौलाना शौकतअली गांधीजी के साथ थे।‘‘ तथा ‘‘गांधीजी की रायपुर तथा धमतरी की प्रथम यात्रा इस दृष्टि से महत्वपूर्ण कही जा सकती है कि धमतरी की जनता ने सत्याग्रह-युग के विधिवत् उद्घाटन के पहले ही असहयोग तथा बहिष्कार के मार्ग पर चलकर सफलता प्राप्त की थी। सन् 1920 में जब गांधीजी धमतरी गए तब तक वहां कण्डेल नहर सत्याग्रह द्वारा जनता विदेशी शासन से लोहा ले चुकी थी और उसे सफलता भी मिल चुकी थी।‘‘ यहां तिथि अथवा माह का उल्लेख नहीं है।

पुस्तक में ‘‘दूसरी यात्रा-1920 रायपुर तथा धमतरी में‘‘ लेख की उल्लेखनीय प्रासंगिक जानकारियां इस प्रकार है कि सितंबर 1920 कलकत्ता में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन, इन दो ऐतिहासिक अधिवेशनों के बीच (पं. रविशंकर शुक्ल के संस्मरण में दी गई जानकारी से यह अलग है।) रायपुर नामक स्थान को इस बात का गौरव प्राप्त है कि उसने गांधीजी का स्वागत किया औैर उनके राजनीतिक विचारों का श्रवण तथा मनन किया। ... ... ... जुलाई के महीने में धमतरी के निकट कंडैल नामक गांव में नहर-सत्याग्रह आरंभ हो गया। गांधीजी की रायपुर की यह यात्रा इसी सत्याग्रह की पृष्ठभूमि में हुई थी। कंडैल नहर-सत्याग्रह के प्रमुख संचालक, पं. सुन्दरलाल शर्मा को गांधीजी से परामर्श के लिए कलकत्ता भेजा गया। किन्तु कलकत्ता में उन की गांधी से भेंट न हो सकी और दक्षिण भारत के किसी स्थान पर ही यह भेंट हुई। श्री शर्मा ने उन्हें कण्डैल नहर-सत्याग्रह का परिचय दिया तथा उनसे धमतरी आने का अनुरोध किया। इस प्रकार वे पं. सुन्दरलाल शर्मा के साथ 20 अथवा 21 दिसम्बर 1920 को कलकत्ता से रायपुर पधारे। उनके साथ अली-बन्धुओं में मौलाना शौकत अली भी थे। ... ... ...

आज जो गांधी चौक है, उस स्थान पर एक विशाल सार्वजनिक सभा में उनका भाषण हुआ। इस समय गांधीजी ने अपने भाषण में असहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। ... ... ... रायपुर से गांधी जी मोटर द्वारा धमतरी और कुरुद गये। ... ... ... धमतरी पहुंचने पर गांधीजी का बड़े उत्साह से स्वागत हुआ। कंडैल सत्याग्रह अब तक समाप्त हो चुका था ... ... ... उनके भाषण का प्रबंध जामू हुसैन के बाड़े में किया गया था ... ... ... श्री उमर सिंह नामक एक कच्छी व्यापारी ने उन्हें कंधे पर बिठाया और मंच तक ले गया ... ... ... श्री बाजीराव कृदत्त ने नगर तथा ग्राम-निवासियों की ओर से गांधीजी को 501 रु. की थैली भेंट की। लगभग 15000 लोगों की उपस्थिति में गांधीजी और मौलाना शौकत अली के भाषण हुए। गांधीजी ने अपने भाषण में असहयोग और सत्याग्रह की बात लोगों को समझाई। श्री शौकतअली ने अपने भाषण में सदा की तरह मजाकिया अंदाज में कहा- मैं तो हाथी जैसा हूं और गांधीजी बकरी जैसे हैं ... ... ...

धमतरी से गांधीजी कंडैल ग्राम भी गये। इस अवसर पर वे कुरुद गांव भी गये ... ... ... धमतरी में गांधीजी के ठहरने की व्यवस्था श्री नारायणराव मेघावाले के निवास-स्थान पर की गई थी जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया। प्रातःकाल वे पुनः रायपुर के लिये रवाना हो गये। ... ... ... धमतरी से लौटने के बाद गांधीजी ने रायपुर में महिलाओं की एक सभा को भी संबोधित किया ... ... ... अनुमानतः दो हजार रुपयों के मूल्य के सोने चांदी के गहने और रुपये एकत्रित हो गये। ... ... ... इस सभा के पश्चात् बापू नागपुर की ऐतिहासिक-कांग्रेस के लिए रवाना हो गये।

सन 1970 में ‘‘छत्तीसगढ़ में गाँधीजी‘‘ का प्रकाशन, रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर से गांधी शताब्दी समारोह समिति द्वारा डॉ. ठा. भा. नायक के सम्पादकत्व में हुआ। इस पुस्तक में श्री हरि ठाकुर ने अपने लेख में लिखा है कि ‘‘देश को गांधीजी ने सर्वप्रथम सत्याग्रह का मार्ग सुझाया। ... ... ... कन्डेल नामक ग्राम में नहर सत्याग्रह आरम्भ हुआ। इस सत्याग्रह के सूत्रधार थे पं. सुन्दरलाल शर्मा ... ... ... अन्त में इस सत्याग्रह के नेताओं ने गांधीजी से पत्र-व्यवहार किया। और गांधीजी ने इस सत्याग्रह का मार्गदर्शन करना स्वीकार किया। गांधीजी उस समय बंगाल का दौरा कर रहे थे। उन्हें बुलाने के लिये पं. सुन्दरलाल शर्मा गये। 20 दिसम्बर सन् 1920 को महात्मा गांधी का प्रथम बार रायपुर आगमन हुआ। उसी दिन उन्होंने गांधी चौक में अपार जनसमूह को संबोधित किया। रायपुर से गांधीजी मोटर द्वारा धमतरी और कुरुद गये।... ... ... गांधीजी के आगमन के साथ ही कंडेल सत्याग्रह स्थगित हो गया। ... ... ... इसलिये गांधीजी धमतरी से ही वापस लौट आये। धमतरी और कुरुद से वापस लौटने पर गांधीजी पुनः राययपुर में रुके और उन्होंने महिलाओं की एक विशाल सभा को संम्बोधित किया। महिलाओं से गांधीजी ने ‘तिलक स्वराज्य‘ फण्ड के लिए मांग की और उन्हें तुरन्त दो हजार रु. के मूल्य के गहने प्राप्त हुए।

इस पुस्तक में केयूर भूषण मिश्र ने अपने लेख में मात्र उल्लेख किया है कि ‘‘कन्डेल सत्याग्रह सन् 1917 में प्रारंभ हुआ और 1920 में इस सत्याग्रह ने सफलता प्राप्त की।‘‘ किंतु यहां सन् 1920 में गांधीजी के छत्तीसगढ़ प्रवास की कोई चर्चा नहीं है। डॉ. शोभाराम देवांगन के लेख में ‘‘इस सत्याग्रह को व्यापक तथा सर्वदेशीय रूप प्रदान करने हेतु यहां से पं. सुन्दरलालजी शर्मा राजिम वाले को 2 दिसम्बर सन् 1920 ईं को महात्मा गांधीजी के पास कलकत्ता इस परिस्थिति का ज्ञान कराने तथा उन्हें धमतरी लाकर आशीर्वाद प्राप्त करने के अतिरिक्त इस सत्याग्रह का संचालन सूत्र उनके हाथ में देने की अपेक्षा कर रवाना किया गया।’’ ... ... ... इस तरह यह नहर सत्याग्रह, महात्मा गांधी के धमतरी आगमन के पूर्व ही पूर्ण सफलता के साथ सम्पन्न हुआ।‘‘ यहां भी सन् 1920 में गांधीजी के छत्तीसगढ़ प्रवास की कोई चर्चा नहीं है।

हरिप्रसाद अवधिया ने लिखा है कि ‘‘अपने आन्दोलन के सर्व प्रथम चरण में ही सन् 1920 में मौलाना शौकत अली को साथ लिये गांधीजी का रायपुर में आगमन हुआ। इस पुस्तक में डॉ बलदेव प्रसाद मिश्र और घनश्याम सिंह गुप्त के संस्मरणों में सन 1920 में गांधीजी के छत्तीसगढ़ के प्रवास की चर्चा नहीं है।

अब्बास भाई का संस्मरण है कि सन् 1921 में महात्माजी और मौलाना शौकत अली का रायपुर में आगमन हुआ। उन्हें धमतरी जाना था परन्तु शासन और पुलिस के आतंक के कारण मोटर मिलना दुष्कर था। पं. शुक्लजी के आह्वान पर मैं महात्माजी, मौलाना शौकत अली और उनकी पार्टी को अपनी मोटर बस में ले जाने के लिए तैयार हुआ। समय पर पुलिस वालों ने मेरे मोटर ड्राइवर को वहीं रोक लिया। ... ... ... मैं महात्माजी और मौलाना सहित पं. शुक्लजी और दूसरे नेतागण को रायपुर ब्राह्मणपारा में जो लाइब्रेरी है, वहां सं बैठाकर धमतरी ले गया। ... ... ... रायपुर मोटर बस सर्विस, रायपुर के नामसे सर्विस चलती थी तथा प्रोप्रायटर वली भाई एण्ड ब्रदर्स। ... ... ... डिप्टी कमिश्नर श्री सी. ए. क्लार्क ने हमारी कंपनी का मोटर चलाने का लाइसेंस भी रद्द कर दिया।

प्रभूलाल काबरा ने लिखा है कि- राजनांदगांव में गांधीजी मौ. मोहम्मद अली, शौकत अली, जमनालाल बजाज, के साथ जब कलकत्ता जा रहे थे ... ... ... जिस समय वे कलकत्ता के खास अधिवेशन में जा रहे थे उसी ट्रेन में लोकमान्य तिलक, दादा साहब खापर्डे, डा. मुंजे भी प्रथम दर्जे के डब्बे में यात्रा कर रहे थे ... ... ... आखिर गांधीजी ने दरवाजा खोला। इसके पश्चात्, जब गांधीजी रायपुर आयेः- में बताया है कि ‘‘ज्योंही गाड़ी प्लेटफार्म पर लगी, श्री शुक्ल आदि नेतागण ... ... ... इस विवरण के साथ सन् नहीं दिया गया है, लेकिन अनुमान होता है कि यह सन् 1933 का विवरण है। कन्हैया लाल वर्मा का संस्मरण भी बिना सन् के उल्लेख के है। अद्वैतगिरी जी ने लिखा है कि सन् 1920 में गांधीजी रायपुर आये। स्वर्गीय श्री सुन्दरलालजी शर्मा के भांजे कन्हैयालाल जी अध्यापक के निवासगृह में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई। संध्याकाल उन्होंने एक आमसभा को संबोधित किया। भाषण के मुख्य विषय देश की स्वतंत्रता, एकता और सत्याग्रह थे।

महंत लक्ष्मीनारायण दास जी ने लिखा है कि सन् 1921 की घटना है, जब महात्मा गांधी पहली बार रायपुर आये और उन्होंने जैतूसाव मठ को अपनी अविस्मरणीय भेंट दी। ... ... ... महात्मा गांधी के साथ उनके दो अनन्य मित्र और अनुयायी स्वर्गीय शौकत अली और स्वर्गीय मोहम्मद अली भी साथ थे।

डा. शोभाराम देवांगन ने लिखा है कि पं. सुन्दरलालजी शर्मा, राजिम वाले, महात्मा गांधी को धमतरी लाने के लिये 2 दिसम्बर, सन् 1920 को कलकत्ता गये थे किन्तु वहां उनसे भेंट न हो सकी। ... ... ... अंत में उनसे दक्षिण भारत के एक नगर में जहां महात्माजी का कार्यक्रम अधिक दिनों के निश्चित था, वहां भेंट होना संभव हुआ। वे गांधीजीको धमतरी तहसील के कंडेल गांव के नहर सत्याग्रह का पूर्ण परिचय कराकर धमतरी में लाने में सफल हुए। 21 दिसंबर, 1920 ई. को ठीक 11 बजे महात्मा गांधी मौलाना शौकत अली के साथ, रायपुर होते हुए यहां पधारे। ... ... ... महात्मा गांधीजी के भाषण का प्रबन्ध यहां के एक प्रसिद्ध सेठ हुसेन के वृहत बाड़े में निश्चित हुआ था ... ... ... गुरुर निवासी श्री उमर सेठ नामक, एक कच्छी व्यापारी झट महात्माजी को उठाकर और अपने कंधों पर बिठाकर ... ... ... मालगुजार श्रीमन बाजीराव कृदत्त महोदय के हाथ से 501/ रुपये की थैली भेंट कर उनका हार्दिक स्वागत किया गया। लेख में बताया गया है कि लगभग 1 घंटे का भाषण हुआ इसके पश्चात् लगभग साढ़े बारह बजे सभा का कार्य समाप्त हुआ। श्री नत्थूजी जगताप के भवन पर फलाहार और लगभग दो बजे दिन को यहां से रायपुर के लिए प्रस्थान किए। इस तरह तीन चार घंटे के लिये यह नगर महात्माजी के आगमन पर आनंद विभोर में मग्न रहा।

श्रीमती प्रकाशवती मिश्र ने लिखा है कि महात्माजी के दर्शन 1920 के दिसम्बर माह में हुए जब रायपुर में उनका आगमन हुआ। कलकत्ते में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन हुआ। लाला लाजपतराय अध्यक्ष थे। उसके पश्चात अखिल भारतवर्षीय दौरे पर कांग्रेस का असहयोग आन्दोलन के प्रचारार्थ महात्माजी रायपुर पधारे। महात्माजी उस समय ठक्कर बैरिस्टर के बंगले में ठहरे थे। ... ... ... महात्माजी रायपुर के दौरे के समय कुरुद व धमतरी भी गये थे।

सन 1920 में गांधीजी के छत्तीसगढ़ प्रवास के संबंध में 1973 में प्रकाशित रायपुर जिला गजेटियर में जानकारी दी गई है कि महात्मा गांधी, कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन के ठीक पहले 20 दिसंबर 1920 को अली बंधुओं के साथ तिलक कोष और स्वराज्य कोष के सिलसिले में रायपुर आए। गांधी जी धमतरी तथा कुरुद भी गए। गजेटियर में कंडेल नहर सत्याग्रह की घटना का विवरण गांधीजी के साथ नहीं, बल्कि पृथक से हुआ है। उल्लेखनीय है कि उक्त जानकारी के मूल स्रोत-संदर्भ का हवाला भी यहां नहीं दिया गया है। इस दौर के अन्य स्रोतों से भी इसी से मिलती-जुलती जानकारी सामने आती है, इसलिए उनका उल्लेख यहां नहीं किया जा रहा है।

सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय खंड 18, जुलाई 1966 में प्रकाशित संस्करण, नेट पर उपलब्ध है, जिसके पेज 229-230 पर, जुलाई से नवंबर 1920, ‘हमारी दैनन्दिनी‘ शीर्षक के अंतर्गत 10 अगस्त से 26 अगस्त तक का विवरण देते हुए लिखा है कि ‘‘हम लगातार 24 घंटे मद्रासके अतिरिक्त और किसी स्थानपर न रह सके और मद्रास भी इसी कारण रह पाए क्योंकि हम पहले-पहल वहीं गये थे। बादमें तो केन्द्रस्थान होनेके कारण हम आते-जाते दो-चार घंटे वहाँ रुकते। सेलमसे बंगलौर की 125 मीलकी यात्रा हमें मोटरमें तय करनी पड़ी थी। इस रफ्तार से यात्रा करना हमारे लिए कुछ अधिक हो जाता था; लेकिन निमन्त्रण बहुत जगहोंसे मिले थे। इनकार करना उचित नहीं लगता था और फिर यह लोभ भी था कि हम जितनी दूरतक अपना सन्देश पहुँचा सकें उतना ही अच्छा है।‘‘ इस दौरे में बम्बई और अहमदाबाद होते गांधीजी 3 सितंबर 1920 की रात में कलकत्ता पहुंचे थे। इसके पश्चात् 10 सितंबर तक कलकत्ता में, 17 सितंबर तक बंगाल में और 20 सितंबर को साबरमती आश्रम में होने की स्पष्ट जानकारी मिलती है। इस प्रकार कलकत्ता विशेष अधिवेशन के पूर्व गांधीजी के रायपुर आगमन की संभावना नहीं जान पड़ती।

सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय खंड 19, नवंबर 1966 में प्रकाशित संस्करण, नेट पर उपलब्ध है, जिसमें नवंबर 1920 से अप्रैल 1921 में पेज 133 पर 16 दिसंबर 1920, गुरुवार को ढाका से कलकत्ता जाते हुए मगनलाल गांधी को लिखे पत्र की जानकारी है। पेज 143 पर 18 दिसंबर को नागपुर की सार्वजनिक सभा में भाषण की जानकारी है। पेज 151 पर 25 दिसंबर को नागपुर की बुनकर परिषद् में भाषण तथा पेज 152 पर नागपुर के अन्त्यज सम्मेलन में भाषण। पेज 161 पर 26 दिसंबर को नागपुर के कांग्रेस अधिवेशन के उद्घाटन दिवस पर, गांधीजी द्वारा में भाषण, श्री विजयराघवाचार्य को कांग्रेस का अध्यक्ष चुनने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया था।


सी. बी. दलाल की अंगरेजी पुस्तक ‘गांधीः 1915-1948‘ ए डिटेल्ड क्रोनोलाजी, गांधी पीस फाउंडेशन नई दिल्ली ने भारतीय विद्या भवन बम्बई के साथ मिलकर सन 1971 में प्रकाशित किया है। पुस्तक के पेज 35 पर माह दिसंबर, सन 1920 के गांधीजी के दैनंदिन का उल्लेख है, जिसके अनुसार गांधीजी ने 17 दिसंबर 1920 को कलकत्ता छोड़ा और 18 दिसंबर 1920 को नागपुर की आमसभा में रहे। इसके पश्चात दिनांक 19 से 23 तक नागपुर में तथा पुनः 31 दिसंबर तक नागपुर के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। एक अन्य अंगरेजी पुस्तक के. पी गोस्वामी की ‘‘महात्मा गांधी ए क्रोनोलाजी‘‘ मार्च 1971 में पब्लिकेशन डिवीजन से प्रकाशित हुई है। इसमें भी गांधीजी के प्रवास की तिथियां दलाल की पुस्तक की तुलना में संक्षिप्त, किंतु पुष्टि करने वाली हैं।


पं. सुंदरलाल शर्मा द्वारा सन 1920 में गांधीजी के छत्तीसगढ़ आने के संबंध में कोई उल्लेख न किया जाना संयोग-मात्र हो सकता है किंतु विसंगतियों तथा प्रामाणिक प्रकाशनों से मिलान करने पर छत्तीसगढ़ के लिए इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक गौरव के प्रसंग पर तथ्यों, दस्तावेजों के साथ असंदिग्ध जानकारियों की आवश्यकता अब भी बनी हुई है। अपने संसाधनों की सीमा में जितनी जानकारी जुटा पाया, जानता हूं कि वह पर्याप्त नहीं है, सुधिजन के परीक्षण हेतु प्रस्तुत है। आशा है कि कुछ और पुष्ट जानकारी प्राप्त हो सकेगी, जिससे इतिहास के पन्नों में स्पष्टीकरण, संशोधन हो सके।

7 comments:

  1. अच्छा लगा। गांधी जी दिखे जैसे कहीं।

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  2. Is shodhparak aalekh ke liye hriday se aapka aabhar.

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  3. Yah shodh parak aalekh dr. Rahul singh hi likh sakta hai .. isme gandhiji ka uddesya ka bhi sahi tarike se ulekh hai .. respected shri prabhu lal kabra wale bhi hain .. sangrahniya .. shobh parakh aalekh ..

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  4. बहुत बढ़िया आलेख। गाँधीजी की छत्तीसगढ़ यात्रा के सभी प्रसंगों को आपने बहुत विस्तार से याद किया है। हार्दिक आभार।

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  5. बहुत बढ़िया आलेख। गाँधीजी की छत्तीसगढ़ यात्रा के सभी प्रसंगों को आपने बहुत विस्तार से याद किया है। हार्दिक आभार।

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  6. सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय में रायपुर यात्रा का जिक्र न होना, कुछ अन्य लेखकों का कंडेल सत्याग्रह के साथ गांधी जी की यात्रा का विवरण न होना कौतूहल पैदा करता है। गांधीजी की 1920 की यात्रा पर आपने लगभग सभी प्रमुख ग्रंथों, लेखों, संस्मरणों को लिया है।

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