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Monday, October 16, 2017

अभिनव


ओलम्पिक में अब तक व्यक्तिगत स्वर्णपदक विजेता इकलौते भारतीय अभिनव बिन्द्रा से 'ब्रेकफास्ट विद चैम्पियन्स' के लिए गौरव कपूर द्वारा लिया गया साक्षात्कार पिछले दिनों यू-टयूब पर आया है। साक्षात्कार के दौरान कुत्‍तों की आवाज आती है, तब गौरव के सवाल पर अभिनव कुत्तों का नाम बताते हैं- टेक्नो और छोटू। बहुतों को पसंद, लेकिन शोरगुल वाले संगीत, टेक्नो नाम आने पर सवाल-

? क्या यह नाम आपके पसंद के संगीत पर दिया गया है
= नहीं
? आप कैसा संगीत सुनना पसंद करते हैं
= मुझे संगीत पसंद नहीं
? बिल्कुल भी
= मुझे शोर पसंद नहीं
? और साफ्ट म्यूजिक
= मुझे नीरवता पसंद है

यानि उन्हें अपना कुत्ता टेक्नो तो पसंद है, लेकिन यह नाम टेक्नो संगीत पसंद होने के कारण नहीं, बल्कि टेक्नो‍ की तरह उसके शोर मचाने के कारण रखा गया। संगीत पर किए गए उपरोक्त चार सवालों का लगभग एक ही जवाब, अलग-अलग तरह से दिया जाना और गोली चलाने वाले को नीरवता पसंद होना भी रोचक लगता है। अंगरेजी संवाद के इस हिन्दी अनुवाद से अभिनव बिन्द्रा के कुछ अलग होने का बस अनुमान लगाया जा सकता है, क्योंकि यह अभिनव के हाव-भाव, मुख-मुद्रा देखे बिना अधूरा ही है। मौन पसंद अभिनव बिन्द्रा की बातें उनके निशाने की तरह सधी हुई और सटीक होती हैं। अपनी सोच में मौलिक और अभिव्यक्ति में संक्षिप्त, स्पष्ट, अनाक्रामक दृढ़।

पहले-पहल अभिनव की बातें नई, कुछ अलग-सी लगती हैं, लेकिन उसमें हमारी परम्परा की अविच्छिन्नता पा लेने में देर नहीं लगती, जिसमें सब कुछ केन्द्र से निकल कर उसके चतुर्दिक छिटकी-खिली इकाइयां हैं। ऐसा लगता है कि शतरंज, बिलियर्ड, निशानेबाजी जैसे खेल, जिनमें सघन एकाग्रता जरूरी हो, भारतीय नस्ल के अनुकूल है और अभिनव, साधना और ध्यान की इस परम्परा के सच्चे प्रतिनिधि जान पड़ते हैं।

A Shot at History पढ़ने का मन बन रहा है ... ... ... खबर मिली कि अभिनव का छोटू पिछले हफ्ते नहीं रहा, मुझे हमारी प्रिंसी का न रहना याद आया, फिर जैक लंडन और प्रेमचंद की कुत्तों की कहानियां और वैद की कुकी।

5 comments:

  1. चरित्र और जीवन शैली में सफ़ेद काला जैसा contrast लगा ।

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  2. वाह, यह अपवर्धन बहुत रोचक है। आभार

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (17-10-2017) को भावानुवाद (पाब्लो नेरुदा की नोबल प्राइज प्राप्त कविता); चर्चा मंच 2760 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन धनतेरस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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