सिंहावलोकन

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Friday, May 12, 2017

समाकर्षात्

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स्वीकारोक्ति- शास्त्र से लिए गए भारतेन्‍दु जी के शब्दों 'भ्रान्ति पुरुष का धर्म्म है', के साथ 'अपना बनाया यह नोट', पाठक की...
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Saturday, April 8, 2017

शहर

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शहर में शहर रहता है शहर में सिर्फ शहर होता है हर शहर का अपना वजूद है उसका अपना वजूद, अपने होने से चिरई-चुरगुन, तालाब-बांधा, मर-मैदान ...
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Saturday, February 4, 2017

इमर

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छत्तीसगढ़ में हाथी के पुराने संदर्भों से वाकिफ हूं, एक नाम आठवीं सदी ईस्वी का उद्योतनसूरिकृत ग्रंथ 'कुवलयमाला' है, जिसमें छत्तीसगढ...
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