सिंहावलोकन

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Saturday, November 1, 2014

रेरा चिरइ

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रेरा चिरइ, रम चूं... चूं... चूं मोर नरवा तीर बसेरा रोवत होही गदेला, रम चूं... चूं... चूं रम चूं... चूं... चूं सब झन खाइन कांदली मैं...
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Sunday, August 25, 2013

हरित-लाल

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हरित फलदार पौधा, पता नहीं लगता परिवर्तन कि, नीचे से लाल हुआ जा रहा. बात कुछ और नहीं बस मिर्ची 'लगी' है, गमले में. '...
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Sunday, July 28, 2013

केदारनाथ

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यह पिण्ड- धरती, कभी आग का धधकता गोला थी, धीरे-धीरे ठंडी हुई। पृथ्‍वी पर जीवन, मानव और आधुनिक मानव के अस्तित्व में आने तक कई हिम युग बीते, ...
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